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निवारक स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभाएगा आयुर्वेद, एआई और तकनीक का समावेश जरूरी: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आयुर्वेद निवारक स्वास्थ्य की रीढ़ है और आधुनिक तकनीक व एआई के साथ इसके समावेश से भविष्य में बेहतर उपचार और वैश्विक पहचान मिलेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत में आयुर्वेद किसी एक काल या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि सदियों से इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति ने जीवन को समझने, संतुलन बनाने और प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहने का मार्ग दिखाया है। वह केरल स्थित “आर्य वैद्य शाला चैरिटेबल हॉस्पिटल” के शताब्दी समारोह को तिरुवनंतपुरम से वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित कर रहे थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने हमेशा निवारक स्वास्थ्य पर जोर दिया है और इसी दृष्टि से राष्ट्रीय आयुष मिशन की शुरुआत की गई। उन्होंने कहा कि समय के साथ आयुर्वेद को आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जोड़ना आवश्यक है, ताकि रोगों की भविष्यवाणी और उपचार के नए तरीके विकसित किए जा सकें।

प्रधानमंत्री मोदी ने आर्य वैद्य शाला को भारत की प्राचीन उपचार परंपरा का जीवंत प्रतीक बताया और इसके संस्थापक वैद्यरत्न पी.एस. वारियर के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान 600 से अधिक आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण करता है और इसके अस्पतालों में 60 से अधिक देशों के मरीज उपचार के लिए आते हैं। पिछले 100 वर्षों से चैरिटेबल हॉस्पिटल द्वारा लगातार सेवा दी जा रही है, जिससे लोगों का विश्वास बना है।

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उन्होंने केरल के लोगों की भी प्रशंसा की, जिन्होंने पीढ़ी-दर-पीढ़ी आयुर्वेदिक परंपराओं को जीवित रखा। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 10–11 वर्षों में सरकार ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को समग्र दृष्टिकोण से देखने की दिशा में बड़ा बदलाव किया है। आयुष मंत्रालय की स्थापना के बाद आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी को एक ढांचे में लाया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभर में 12,000 से अधिक आयुष वेलनेस केंद्र खोले गए हैं, जिससे योग, निवारक देखभाल और सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। आयुष उत्पादों के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे किसानों को लाभ मिला है।

उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को वैश्विक मंचों जैसे जी20 और ब्रिक्स में भी प्रस्तुत किया गया है। जामनगर में डब्ल्यूएचओ का ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर स्थापित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि परंपरा और आधुनिकता के समन्वय से ही आयुर्वेद भविष्य में और सशक्त बनेगा।

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