बांग्लादेश चुनाव 2026: नए राजनीतिक समीकरण से भारत-बांग्लादेश संबंधों पर पड़ सकता है बड़ा असर
12 फरवरी के बांग्लादेश चुनाव भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए अहम हैं। परिणाम के आधार पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ सकता है या तनाव और गहरा सकता है।
बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों पर पूरे दक्षिण एशिया की नजरें टिकी हैं। यह चुनाव शेख हसीना की सरकार के 2024 में बड़े जनआंदोलन के बाद सत्ता से हटने के बाद पहला राष्ट्रीय मतदान होगा। छात्र आंदोलन के दबाव में हसीना के इस्तीफे और भारत आने के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी थी।
पिछले एक साल में भारत-बांग्लादेश संबंधों में कुछ तनाव देखने को मिला है। यूनुस ने कई मौकों पर पाकिस्तान और चीन के साथ निकटता दिखाई है, जिससे सीमा सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे भारत के लिए अहम बन गए हैं।
इस चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही है। पार्टी के अध्यक्ष तारिक रहमान हैं और चुनाव में उनकी जीत की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा जमात-ए-इस्लामी सहित 11 दलों का गठबंधन भी चुनाव मैदान में है। वहीं, पूर्व सैन्य शासक हुसैन मुहम्मद इरशाद की जातीय पार्टी के कई धड़े अलग-अलग गठबंधनों के साथ चुनाव लड़ रहे हैं।
और पढ़ें: बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंसा का साया, 127 मिलियन मतदाता करेंगे मतदान
भारत के लिए सबसे बड़ा झटका यह है कि शेख हसीना की अवामी लीग, जिसे भारत के करीब माना जाता था, को इस चुनाव में भाग लेने से रोक दिया गया है।
यदि BNP जीतती है, तो वह संतुलित विदेश नीति अपनाते हुए भारत से संबंध सुधारने की कोशिश कर सकती है, हालांकि इसमें समय लग सकता है। यदि BNP को बहुमत नहीं मिला और वह जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन करती है, तो 1971 के इतिहास के कारण रिश्तों में जटिलता आ सकती है।
वहीं, यदि कट्टरपंथी दलों का प्रभाव बढ़ता है, तो सीमा, पानी बंटवारे और पूर्वोत्तर भारत जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के संबंध और तनावपूर्ण हो सकते हैं।
और पढ़ें: ईरान की यात्रा से बचें: भारत सरकार ने जारी की नई एडवाइजरी