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बेंगलुरु की पानी की कहानी: अपनी झीलों के बावजूद कावेरी नदी पर क्यों निर्भर है देश की टेक राजधानी

बेंगलुरु अपनी जल जरूरतों के लिए मुख्य रूप से कावेरी नदी पर निर्भर है। कमजोर मानसून, घटते भूजल और सूखते जलाशयों ने शहर की जल सुरक्षा चिंता बढ़ाई है।

बेंगलुरु की पानी की कहानी: कावेरी नदी पर टिकी है टेक राजधानी की जल व्यवस्था

भारत की टेक राजधानी बेंगलुरु इन दिनों कम बारिश के कारण जल संकट की चिंता से जूझ रही है। जहां देश के कई हिस्सों में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं बेंगलुरु में लंबे समय से सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। शहर की जल आपूर्ति काफी हद तक कावेरी नदी पर निर्भर है।

आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 9 जुलाई के बीच बेंगलुरु में सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। वहीं कर्नाटक के दक्षिणी आंतरिक क्षेत्रों में भी इस अवधि के दौरान लगभग 24 प्रतिशत बारिश की कमी रही। हालांकि बेंगलुरु जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड ने कहा है कि शहर में अगले तीन से चार महीनों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है, लेकिन कई इलाकों में भूजल स्तर गिरने के कारण पानी की कमी महसूस की जा रही है।

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कावेरी नदी से मिलता है बेंगलुरु को पानी

बेंगलुरु की जल जरूरतों का बड़ा हिस्सा कावेरी नदी से पूरा होता है। शहर में पानी को थोरकदनहल्ली (टीके हल्ली) जल ग्रहण केंद्र से लिया जाता है और पाइपलाइन व जल शोधन संयंत्रों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाता है।

बेंगलुरु समुद्र तल से करीब 900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, इसलिए कावेरी का पानी शहर तक पहुंचाने के लिए इसे लगभग 500 से 600 मीटर ऊपर उठाना पड़ता है। यही वजह है कि बेंगलुरु की जल आपूर्ति व्यवस्था देश की सबसे अधिक ऊर्जा खपत वाली शहरी जल प्रणालियों में शामिल मानी जाती है।

पुराने जलाशय नहीं बन पाए भरोसेमंद स्रोत

बेंगलुरु के पास दो ऐतिहासिक जलाशय हैं- हेसेरघट्टा झील और टिप्पगोंडनहल्ली (टीजी हल्ली) जलाशय। दोनों अर्कावती नदी पर बने हैं। कभी ये शहर के प्रमुख जल स्रोत हुआ करते थे, लेकिन पिछले कई दशकों में कम बारिश, तेजी से बढ़ते शहरीकरण, अतिक्रमण, प्रदूषण और भूजल की कमी के कारण इनकी जल क्षमता काफी घट गई है।

इसके अलावा मन्चनबेले जलाशय भी अर्कावती नदी पर स्थित है, लेकिन इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से सिंचाई के लिए किया जाता है और यह बेंगलुरु की जल जरूरतों का बड़ा समाधान नहीं है।

मानसून क्यों है बेहद जरूरी?

बेंगलुरु के लिए दक्षिण-पश्चिम मानसून बेहद महत्वपूर्ण है। अच्छी बारिश कावेरी नदी बेसिन के जलाशयों को भरने में मदद करती है। खासकर कृष्णराज सागर (केआरएस) और कबिनी जलाशयों में पर्याप्त पानी होना जरूरी है, क्योंकि इन्हीं से कावेरी जल आपूर्ति योजना को सहारा मिलता है।

कमजोर मानसून की स्थिति में इन जलाशयों का जल स्तर घट सकता है, जिससे शहर की जल उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है।

कितनी पानी की आपूर्ति मिलती है बेंगलुरु को?

बीएसडब्ल्यूएसएसबी के आंकड़ों के मुताबिक, बेंगलुरु के लोगों को प्रतिदिन लगभग 1,450 से 1,500 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। इससे करीब 1.4 से 1.5 करोड़ आबादी की जरूरत पूरी होती है।

हालांकि शहर के सभी इलाकों में पानी की उपलब्धता समान नहीं है। कुछ क्षेत्रों में नियमित आपूर्ति होती है, जबकि कई जगहों पर भूजल स्तर कम होने के कारण परेशानी बनी रहती है।

अन्य महानगरों की तुलना में बेंगलुरु की जल व्यवस्था आसपास के जलाशयों पर कम और कावेरी नदी बेसिन की स्थिति पर अधिक निर्भर है। इसलिए शहर के लिए अच्छी बारिश और मजबूत मानसून जल सुरक्षा की सबसे बड़ी जरूरत है।

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