बिहार में तीन महीने में बनेगा ‘माटी कला बोर्ड’, प्रजापति समाज और पारंपरिक कुम्हारी कला को मिलेगा बढ़ावा: सम्राट चौधरी
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रजापति समाज और पारंपरिक मिट्टी कला को बढ़ावा देने के लिए तीन महीने में माटी कला बोर्ड गठित करने की घोषणा की।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रजापति समाज और पारंपरिक मिट्टी कला को बढ़ावा देने के लिए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि राज्य में अगले तीन महीने के भीतर ‘माटी कला बोर्ड’ का गठन किया जाएगा। इस बोर्ड का उद्देश्य प्रजापति समाज के लोगों को प्रोत्साहित करना और पारंपरिक कुम्हारी कला को संरक्षण देना होगा।
मुख्यमंत्री ने यह घोषणा रविवार को पटना के श्रीकृष्ण स्मारक भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की। यह कार्यक्रम बिहार कुम्हार (प्रजापति) समन्वय समिति की ओर से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में अमर शहीद रामचंद्र विद्यार्थी की पुण्यतिथि मनाई गई और हाल ही में निर्वाचित सदस्यों को सम्मानित किया गया।
सम्राट चौधरी ने कहा कि मिट्टी से जुड़े पारंपरिक शिल्प और कुम्हारी कला बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आधुनिक दौर में इस पारंपरिक व्यवसाय के सामने कई चुनौतियां खड़ी हुई हैं। ऐसे में सरकार का प्रयास होगा कि प्रजापति समाज के लोगों को आवश्यक सहयोग और बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
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प्रस्तावित माटी कला बोर्ड के माध्यम से पारंपरिक मिट्टी के बर्तन और अन्य हस्तशिल्प को बढ़ावा देने, कारीगरों को प्रोत्साहन देने तथा उनकी कला को बाजार से जोड़ने पर काम किया जा सकता है। इससे इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार समाज के विभिन्न वर्गों के विकास के लिए काम कर रही है। पारंपरिक कलाकारों और कारीगरों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना भी इसी प्रयास का हिस्सा है।
कार्यक्रम में प्रजापति समाज के प्रतिनिधियों और अन्य गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। माटी कला बोर्ड के गठन की घोषणा को पारंपरिक कुम्हारी कला और इससे जुड़े समुदाय के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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