टीएमसी चुनाव चिन्ह विवाद पर भाजपा का पलटवार, सुधांशु त्रिवेदी बोले- राहुल पहले अपनी पार्टी का इतिहास देखें
टीएमसी नाम और चुनाव चिन्ह विवाद पर राहुल गांधी के आरोपों का भाजपा ने जवाब दिया। सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास और पूर्व सरकारों से समर्थन वापसी का मुद्दा उठाया।
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर जारी विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को कहा कि राहुल गांधी को भाजपा पर आरोप लगाने से पहले अपनी ही पार्टी के राजनीतिक इतिहास को देखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए कई विपक्षी सरकारों से समर्थन वापस लेकर गिराया था।
नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान त्रिवेदी ने पूर्व प्रधानमंत्रियों एच.डी. देवगौड़ा, चौधरी चरण सिंह, चंद्रशेखर और आई.के. गुजराल की सरकारों का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इन सरकारों से अचानक समर्थन वापस लेकर उन्हें सत्ता से बाहर किया था।
त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी को अपनी पार्टी के इतिहास की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस नेता को अपनी पार्टी का इतिहास ही पता नहीं है, तो उन्हें पहले उस इतिहास को समझना चाहिए, उसके बाद ही भाजपा पर राजनीतिक आरोप लगाने चाहिए। ये टिप्पणियां भाजपा की ओर से राहुल गांधी के आरोपों के जवाब में की गईं।
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टीएमसी विवाद पर राहुल ने लगाए थे आरोप
राहुल गांधी ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग की अंतरिम रोक को लेकर भाजपा और आयोग पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि पहले शिवसेना, फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और अब तृणमूल कांग्रेस के मामले में पार्टियों को विभाजित करने और चुनाव चिन्ह पर रोक लगाने का एक जैसा पैटर्न दिखाई देता है।
इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास और विभिन्न दलों के गठन से जुड़े घटनाक्रमों का हवाला देते हुए राहुल गांधी के बयान पर जवाब दिया।
चुनाव आयोग के फैसले से शुरू हुआ विवाद
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को तृणमूल कांग्रेस के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनाव में पार्टी के नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया था। आयोग ने दोनों गुटों से वैकल्पिक नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प मांगे थे।
बाद में आयोग ने दोनों गुटों के लिए अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए। मूल नाम और चिन्ह को लेकर अंतिम निर्णय का मामला आयोग के समक्ष जारी है।
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