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बजट 2026: वित्त मंत्री के सामने तीन बड़ी मैक्रो आर्थिक चिंताएँ

बजट 2026 में सरकार की विकास दर, खर्च की प्राथमिकताएँ और राजस्व जुटाने की रणनीति सामने आएगी, जिसमें महंगाई, वित्तीय घाटा और आर्थिक स्थिरता वित्त मंत्री की प्रमुख चिंताएँ होंगी।

जब भी सरकार केंद्रीय बजट तैयार करती है, उसका उद्देश्य केवल आय-व्यय का ब्योरा देना नहीं होता, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को दिशा देना भी होता है। मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में यह सवाल और भी अहम हो जाता है कि सरकार बजट के जरिए क्या हासिल करना चाहती है और वित्त मंत्री के सामने मुख्य चुनौतियाँ क्या होंगी।

रविवार, 1 फरवरी 2026, को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अगले वित्त वर्ष अप्रैल 2026 से मार्च 2027 के लिए बजट पेश करेंगी। बजट दस्तावेज़ आमतौर पर तीन प्रमुख जानकारियाँ देता है।

पहला, सरकार आने वाले वर्ष में आर्थिक विकास दर (Growth Rate) को लेकर क्या अनुमान लगाती है और विभिन्न योजनाओं, मंत्रालयों तथा विभागों पर कितना खर्च करने की योजना बनाती है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार की प्राथमिकताएँ क्या हैं — जैसे बुनियादी ढांचा, सामाजिक कल्याण, रक्षा व शिक्षा।

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दूसरा, सरकार यह स्पष्ट करती है कि वह राजस्व कैसे जुटाएगी। इसमें कर राजस्व, जैसे आयकर और कॉरपोरेट टैक्स, के साथ-साथ गैर-कर राजस्व भी शामिल होता है। गैर-कर आय में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से मिलने वाला लाभांश, परिसंपत्तियों की बिक्री से होने वाली आय, और स्पेक्ट्रम जैसे संसाधनों की नीलामी से प्राप्त धन शामिल होता है।

तीसरा, बजट यह बताता है कि खर्च और आय के बीच संतुलन कैसे साधा जाएगा। मौजूदा समय में सरकार के सामने महंगाई नियंत्रण, वित्तीय घाटा, और निवेश रोजगार बढ़ाने जैसी मैक्रो-आर्थिक चिंताएँ प्रमुख हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू मांग की स्थिति को देखते हुए बजट 2026 से यह उम्मीद की जा रही है कि वह विकास और स्थिरता के बीच संतुलन बनाएगा।

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