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बजट 2026: कम-ग्रेड लौह अयस्क के संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए वेदांता ने नीति समर्थन की मांग की

वेदांता ने बजट 2026 से पहले कम-ग्रेड लौह अयस्क के संवर्धन हेतु प्रोत्साहन और नीति समर्थन की मांग की, ताकि घरेलू आपूर्ति बढ़े और रोजगार व राजस्व सृजित हो।

बजट 2026 से पहले वेदांता समूह की लौह अयस्क खनन इकाई सेसा गोवा ने सरकार से कम-ग्रेड लौह अयस्क के संवर्धन (बेनीफिशिएशन) को बढ़ावा देने के लिए ठोस नीति समर्थन और प्रोत्साहन देने की अपील की है। कंपनी का कहना है कि लक्षित नीतिगत सहायता और बुनियादी ढांचे में निवेश के बिना इस प्रक्रिया को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाना कठिन है।

सेसा गोवा के सीईओ नवीन जाजू ने कहा कि भारत के पास खदानों के मुहाने पर ही 300 मिलियन टन से अधिक कम-ग्रेड लौह अयस्क का विशाल भंडार मौजूद है, लेकिन संवर्धन संयंत्रों और सहायक ढांचे की ऊंची शुरुआती लागत के कारण इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। संवर्धन प्रक्रिया के जरिए कम गुणवत्ता वाले अयस्क से सिलिका, एल्यूमिना और फॉस्फोरस जैसी अशुद्धियों को हटाकर उसमें लौह तत्व की मात्रा बढ़ाई जाती है, जिससे वह इस्पात उत्पादन के योग्य बनता है।

उन्होंने कहा कि 2030 तक भारत में इस्पात की मांग 300 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में कम-ग्रेड अयस्क के संवर्धन से घरेलू आपूर्ति सुरक्षा मजबूत होगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और खनन व निर्यात बढ़ने से सरकारी राजस्व में भी अरबों रुपये की वृद्धि हो सकती है।

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नवीन जाजू ने कम-ग्रेड अयस्क पर निर्यात शुल्क का विरोध करते हुए कहा कि भारत में कच्चे माल की कोई कमी नहीं है और इस पर शुल्क लगाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने मुक्त मूल्य निर्धारण और बेहतर परिवहन ढांचे की वकालत की, ताकि घरेलू संवर्धन को प्राथमिकता देते हुए निर्यात भी संभव हो सके।

उन्होंने आगामी केंद्रीय बजट में समयबद्ध ढांचे के तहत कर छूट, सब्सिडी और प्रोत्साहन देने की मांग की, जिससे कम-ग्रेड अयस्क को रणनीतिक संपत्ति में बदला जा सके।

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