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FCRA विधेयक 2026 पर 31 सदस्यीय जेपीसी गठित, भाजपा सांसद संजय जयसवाल होंगे अध्यक्ष

केंद्र ने एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 की समीक्षा के लिए 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति गठित की है। भाजपा सांसद संजय जयसवाल समिति के अध्यक्ष बनाए गए हैं।

केंद्र सरकार ने विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2026 यानी एफसीआरए विधेयक की जांच के लिए 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन किया है। लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, बिहार के बेतिया से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद संजय जयसवाल समिति के अध्यक्ष होंगे।

संयुक्त संसदीय समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल किए गए हैं। समिति को एफसीआरए संशोधन विधेयक के प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा करने और शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक अपनी रिपोर्ट लोकसभा में पेश करने को कहा गया है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित इस समिति में भाजपा के 14 और कांग्रेस के पांच सदस्य हैं। इसके अलावा जनता दल (यूनाइटेड), तृणमूल कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के दो-दो सदस्य शामिल हैं। समाजवादी पार्टी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और तेलुगु देशम पार्टी से एक-एक सदस्य समिति में हैं।

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विपक्ष के विरोध के बाद जेपीसी को भेजा गया विधेयक

एफसीआरए संशोधन विधेयक को 12 अगस्त को संसद ने संयुक्त समिति के पास भेजा था। विपक्षी दलों ने विधेयक के कई प्रावधानों का विरोध किया है। उनका आरोप है कि प्रस्तावित बदलाव अल्पसंख्यकों और गैर-सरकारी संगठनों को प्रभावित कर सकते हैं।

विपक्ष ने विधेयक वापस लेने की मांग करते हुए कहा है कि इसके कुछ प्रावधान ईसाई गैर-सरकारी संगठनों तथा अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित सामाजिक कल्याण और शैक्षणिक संस्थानों को मिलने वाली वैध विदेशी सहायता पर असर डाल सकते हैं।

हालांकि, केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि विधेयक किसी विशेष धर्म को निशाना बनाने के लिए नहीं है, बल्कि विदेशी अंशदान की निगरानी और नियमन व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया है।

विधेयक में क्या प्रस्तावित है?

विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। इसका उद्देश्य भारत में विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों और संस्थाओं पर सरकारी निगरानी को मजबूत करना है। प्रस्तावित बदलावों में एक नामित प्राधिकरण बनाने की योजना भी शामिल है, जो किसी संगठन का एफसीआरए लाइसेंस समाप्त होने की स्थिति में उसकी संपत्तियों के प्रबंधन और निपटारे की जिम्मेदारी संभालेगा।

अब जेपीसी इस विधेयक के सभी प्रावधानों की जांच करेगी। समिति की रिपोर्ट के बाद विधेयक पर संसद में आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।

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