यूपी और पूर्वोत्तर राज्यों में ईडब्ल्यूएस छात्रों के लिए मेरिट छात्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहा केंद्र
केंद्र सरकार ने यूपी और पूर्वोत्तर राज्यों में एनएमएमएसएस के तहत ईडब्ल्यूएस छात्रों के लिए मेरिट छात्रवृत्ति को बढ़ावा देने हेतु जागरूकता अभियान शुरू किया है।
केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश और सभी पूर्वोत्तर राज्यों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के मेधावी छात्रों के लिए नेशनल मीन्स-कम- मेरिट स्कॉलरशिप स्कीम (NMMSS) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है। यह पहल शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा की गई है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य कक्षा 8 के बाद स्कूल छोड़ने की दर को कम करना, शिक्षा में समानता को बढ़ावा देना और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के मेधावी छात्रों को माध्यमिक स्तर तक पढ़ाई जारी रखने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
एनएमएमएसएस के तहत हर वर्ष कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले पात्र छात्रों को एक लाख नई छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं। इन छात्रों का चयन राज्य या केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर आयोजित परीक्षाओं के माध्यम से किया जाता है। चयनित छात्रों को प्रति वर्ष 12,000 रुपये (1,000 रुपये प्रति माह) की छात्रवृत्ति दी जाती है। यह सहायता सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और स्थानीय निकायों द्वारा संचालित स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए उपलब्ध है।
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यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना वर्ष 2008 में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की मंजूरी से शुरू की गई थी। 1 अप्रैल 2017 से छात्रवृत्ति राशि को 6,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिवर्ष कर दिया गया। कैबिनेट ने इस योजना को वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक जारी रखने को मंजूरी दी है, जिसके लिए कुल 1,827 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
छात्रवृत्ति के लिए पात्रता की शर्तों में माता-पिता की वार्षिक आय 3.5 लाख रुपये से अधिक न होना, कक्षा 7 में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक (एससी/एसटी के लिए 5 प्रतिशत की छूट) और सरकारी स्कूल में नियमित छात्र होना शामिल है। केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय, आवासीय और निजी स्कूलों के छात्र इस योजना के पात्र नहीं हैं।
यह योजना नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) के माध्यम से संचालित की जाती है और छात्रवृत्ति की राशि सीधे छात्रों के बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भेजी जाती है।
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