धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर केंद्र की प्रतिक्रिया, किरण रिजिजू ने सार्वजनिक सेवा के समर्पण की सराहना की
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने शिक्षा सुधारों और देश सेवा के प्रति धर्मेंद्र प्रधान की प्रतिबद्धता को याद किया।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का सार्वजनिक जीवन का सफर देश सेवा और छात्रों के कल्याण के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
किरण रिजिजू की प्रतिक्रिया धर्मेंद्र प्रधान के उस समय इस्तीफा देने के बाद आई है, जब नीट (यूजी) परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर दिल्ली में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। प्रदर्शनकारी संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा था।
अरुणाचल प्रदेश से लोकसभा सांसद किरण रिजिजू ने कहा कि उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल में काम किया है और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उनकी ईमानदार कोशिशों को करीब से देखा है।
रिजिजू ने कहा कि शिक्षा जैसा महत्वपूर्ण क्षेत्र संभालने के लिए धैर्य, दूरदृष्टि और मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत होती है और धर्मेंद्र प्रधान ने इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाया। उन्होंने उम्मीद जताई कि धर्मेंद्र प्रधान भविष्य में भी उसी विश्वास और ईमानदारी के साथ देश की सेवा करते रहेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान पिछले कई दिनों से नीट पेपर लीक मामले को लेकर विपक्ष और छात्रों के निशाने पर थे। सीजेपी ने सरकार से जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की थी। संगठन ने 20 जुलाई को दिल्ली में ‘चलो संसद’ मार्च निकालने की योजना बनाई थी, जिसके दौरान राजधानी में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी।
शुक्रवार तक ऐसी खबरें थीं कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे, लेकिन दिल्ली में बढ़ते विरोध और दबाव के बीच उन्होंने अपने पद से हटने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि पिछले दस दिनों में जो कुछ हुआ, उससे वह काफी दुखी हैं।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर सीजेपी समर्थकों ने जश्न मनाया। प्रदर्शनकारियों ने एक-दूसरे को गले लगाया, तिरंगा लहराया, राष्ट्रगान गाया और ‘वंदे मातरम्’ के नारे लगाए।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस्तीफे का स्वागत करते हुए कहा कि यह देश में लोकतांत्रिक विरोध की ताकत को दर्शाता है। उन्होंने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों और युवाओं की एकजुट आवाज ने सरकार को निर्णय लेने के लिए मजबूर किया।