सीजेपी आंदोलन पर केंद्र की समीक्षा, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर नहीं होगी कार्रवाई; हिंसा करने वालों पर शिकंजा संभव
केंद्र सरकार ने सीजेपी आंदोलन से जुड़े मामलों की समीक्षा शुरू की है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, जबकि हिंसा और उपद्रव में शामिल लोगों पर कार्रवाई जारी रह सकती है।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को लेकर उठी शिकायतों के बाद केंद्र सरकार ने मामले की समीक्षा शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने दिल्ली और अन्य भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों में आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की रिपोर्ट तलब की है।
सूत्रों का कहना है कि जिन लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया था, उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, जिन लोगों पर हिंसा, तोड़फोड़ या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है।
गौरतलब है कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को समाप्त करने के लिए सीजेपी ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी थीं। इनमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग भी शामिल थी। शनिवार को सीजेपी के प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रांका ने दावा किया था कि सरकार ने उनकी यह मांग स्वीकार कर ली है।
हालांकि, सीजेपी का आरोप है कि अब तक एफआईआर वापस नहीं ली गई हैं। सोमवार को आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि लिखित समझौते के अनुसार सरकार को मंगलवार तक दर्ज मामलों का कानूनी विवरण साझा करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामलों को तत्काल वापस नहीं लिया गया तो पार्टी दोबारा आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होगी।
रांका ने आरोप लगाया कि बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और अन्य राज्यों में कई छात्रों को गिरफ्तार किया गया है तथा आंदोलन से जुड़े स्वयंसेवकों की निगरानी और कथित रूप से उत्पीड़न किया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस को अब तक एफआईआर वापस लेने का कोई औपचारिक आदेश नहीं मिला है। नई दिल्ली जिले में लगभग 15 एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस का कहना है कि यदि मामलों को वापस लेने का आदेश भी मिलता है, तब भी आंदोलन के दौरान हुई कथित व्यापक साजिश और हिंसा की जांच जारी रहेगी।
जांच एजेंसियां फिलहाल सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल साक्ष्य और मोबाइल फोन रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं, ताकि हिंसा और उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सके।