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आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई और एबीडीएम के अगले चरण की तैयारी, केंद्र और राज्यों ने बनाया रोडमैप

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की बैठक में केंद्र और राज्यों ने आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई और डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के अगले चरण की रणनीति तैयार की। योजना के बेहतर क्रियान्वयन पर चर्चा हुई।

केंद्र सरकार और राज्यों ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के अगले चरण के लिए रोडमैप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण चर्चा की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत काम करने वाले राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा बैठक (चिंतन शिविर) की शुरुआत की।

इस बैठक का उद्देश्य आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई के क्रियान्वयन की समीक्षा करना और भविष्य की रणनीति तैयार करना है। इसमें केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

बैठक में योजना के तहत लाभार्थियों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, अस्पतालों के नेटवर्क को मजबूत करने, डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और बेहतर निगरानी व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।

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अधिकारियों ने बताया कि आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। बैठक में योजना को और प्रभावी बनाने के लिए राज्यों के अनुभवों और सुझावों को भी शामिल किया गया।

इसके अलावा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड, स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी विचार-विमर्श किया गया।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय से स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। बैठक में राज्यों के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान पर भी चर्चा की गई।

स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग को देखते हुए सरकार एबीडीएम के विस्तार पर विशेष जोर दे रही है। इसके माध्यम से मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने और स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

दो दिवसीय चिंतन शिविर में आने वाले वर्षों के लिए नीतिगत दिशा और योजनाओं के प्रभावी संचालन को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावना है।

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