मामलों के निपटारे के लिए विशेष अदालतें और समयबद्ध सुनवाई जरूरी: सीजेआई सूर्यकांत
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने लंबित मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हर मामले के लिए समान समयसीमा संभव नहीं, इसलिए विशेष अदालतों और समयबद्ध सुनवाई की जरूरत है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने देश की न्यायपालिका में लंबित मामलों की चुनौती पर चिंता जताते हुए विशेष अदालतों और मामलों की प्रकृति के अनुसार समयबद्ध सुनवाई की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सभी मामलों के लिए एक जैसी समयसीमा निर्धारित करना व्यावहारिक नहीं हो सकता।
सीजेआई सूर्यकांत ने न्यायिक व्यवस्था में लंबित मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में मामलों का लंबित रहना न्यायपालिका के सामने एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने माना कि इस दिशा में काफी सुधार हुआ है, लेकिन इसके बावजूद आम जनता की अपेक्षा है कि उसे समय पर न्याय मिले।
उन्होंने कहा कि मामलों की प्रकृति अलग-अलग होती है और इसी वजह से हर मामले के निपटारे के लिए एक समान समयसीमा तय नहीं की जा सकती। कुछ मामलों में अधिक समय और विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता होती है, जबकि कुछ मामलों का निपटारा अपेक्षाकृत कम समय में किया जा सकता है।
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विशेष अदालतों की जरूरत पर जोर
मुख्य न्यायाधीश ने लंबित मामलों को कम करने के लिए न्यायिक ढांचे में विशेषज्ञता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, विशेष प्रकार के मामलों के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने से सुनवाई की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तेज हो सकती है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि समयबद्ध सुनवाई का उद्देश्य केवल मामलों को जल्दी खत्म करना नहीं होना चाहिए, बल्कि न्याय की गुणवत्ता बनाए रखते हुए लोगों को उचित समय में निर्णय उपलब्ध कराना होना चाहिए।
सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका में सुधार की प्रक्रिया लगातार जारी है। अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम करने के लिए न्यायिक संसाधनों को मजबूत करना, प्रक्रियाओं को बेहतर बनाना और मामलों के प्रभावी प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जनता की न्याय व्यवस्था से समय पर और निष्पक्ष फैसले की अपेक्षा पूरी तरह उचित है। ऐसे में विशेष अदालतों और मामले की प्रकृति के अनुरूप समयबद्ध सुनवाई की व्यवस्था न्यायिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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