फर्जी जातिगत बयान पर भड़के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, बोले- यह घोर बेईमानी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोशल मीडिया पर वायरल फर्जी जातिगत बयान को खारिज करते हुए इसे घोर बेईमानी बताया और अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की बात कही।
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित जातिगत बयान को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया है। उन्होंने इस मामले को “घोर बेईमानी” करार देते हुए कहा कि उनके नाम से झूठे बयान फैलाए जा रहे हैं।
9 मई को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में मुख्य न्यायाधीश कार्यालय ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर एक फर्जी बयान तेजी से प्रसारित किया जा रहा है, जिसे गलत तरीके से न्यायमूर्ति सूर्यकांत से जोड़कर पेश किया गया। वायरल संदेश में कथित तौर पर लिखा गया था, “यदि कोई समाज आईएएस, आईपीएस, सीजेआई, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री होने के बाद भी खुद को शोषित मानता है, तो दोष ब्राह्मणों का नहीं है।”
मुख्य न्यायाधीश कार्यालय ने साफ कहा कि न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने ऐसा कोई बयान कभी नहीं दिया। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि इस प्रकार की झूठी और भ्रामक सामग्री फैलाना न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है।
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सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने लोगों से अपील की कि वे बिना पुष्टि किए किसी भी बयान या पोस्ट को साझा न करें। साथ ही यह भी कहा गया कि फर्जी जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।
इस मामले के सामने आने के बाद कई लोगों ने फर्जी खबरों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के नाम से गलत बयान फैलाना गंभीर अपराध माना जा सकता है।
न्यायपालिका ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि समाज में भ्रम और तनाव फैलाने वाली अफवाहों से सावधान रहना जरूरी है।
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