चलो संसद मार्च में बवाल, आंसू गैस और लाठीचार्ज; पुलिस ने अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी से किया इनकार
‘चलो संसद’ मार्च के दौरान दिल्ली में प्रदर्शन उग्र हो गया। पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज किया, जबकि अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी की खबरों से इनकार किया।
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान सोमवार को राजधानी दिल्ली में भारी हंगामा देखने को मिला। संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगाए, लेकिन प्रदर्शनकारियों द्वारा इन्हें पार करने की कोशिश के बाद आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज भी किया गया। इस दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने पहले दावा किया था कि संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। हालांकि बाद में उन्होंने अपना बयान वापस लेते हुए स्पष्ट किया कि दिपके को न तो हिरासत में लिया गया है और न ही गिरफ्तार किया गया है।
प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि नीट परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं के लिए सरकार जिम्मेदार है और अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे कई सप्ताह से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि उनकी केवल एक ही मांग है कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें और परीक्षा प्रणाली में सुधार किया जाए।
इसी बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संसद परिसर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। हालांकि इस बैठक में क्या चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
विपक्षी दलों के कई नेताओं ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं पर चर्चा करने के बजाय उन पर बल प्रयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति से जुड़े गंभीर सवालों पर संसद में चर्चा होनी चाहिए।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया। उनकी पार्टी ने दावा किया कि उन्हें भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं, ने अस्पताल प्रशासन से संसद मार्च में शामिल होने के लिए अस्थायी रूप से बाहर जाने की अनुमति मांगी है। उन्होंने पत्र में कहा कि उनकी तबीयत सामान्य है। वहीं, दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें निजी अस्पताल भेजने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए सरकारी अस्पताल में उपचार जारी रखने के फैसले को बरकरार रखा।
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