सीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने जेपी नड्डा से की मुलाकात, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई
‘चलो संसद’ मार्च के बीच सीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने जेपी नड्डा से मुलाकात कर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा सुधारों की मांग रखी।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘चलो संसद’ मार्च के बीच सोमवार को संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कथित नीट परीक्षा अनियमितताओं के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ‘चलो संसद’ मार्च को लेकर राजधानी दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को संसद मार्ग के पास रोक दिया गया, जिसके बाद कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बन गई।
प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिसके बाद शास्त्री भवन के पास सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की भारी तैनाती के बीच संसद क्षेत्र की ओर जाने वाले रास्तों पर कड़ी निगरानी रखी गई।
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सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली जिले में अतिरिक्त पुलिस बल और अर्द्धसैनिक कंपनियां तैनात की गई हैं। पड़ोसी जिलों से भी पुलिसकर्मियों को बुलाकर प्रमुख चौराहों, सरकारी इमारतों और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है, ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके के नेतृत्व में संगठन 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहा है। प्रदर्शनकारी आरोप लगा रहे हैं कि नीट परीक्षा में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और प्रभावित छात्रों को न्याय नहीं मिला है। इसी के साथ वे परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
सीजेपी ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ‘चलो संसद’ मार्च का आह्वान किया था। हालांकि पुलिस ने संसद की सुरक्षा को देखते हुए प्रदर्शनकारियों को संसद मार्ग के पास ही रोक दिया। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।
फिलहाल, सीजेपी और केंद्र सरकार के बीच हुई बातचीत के परिणाम पर सभी की नजरें टिकी हैं। संगठन का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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