कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने VBSA विधेयक, 2025 पर चिंता जताई; IIT और IIM की शैक्षणिक स्वतंत्रता खतरे में
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने VBSA विधेयक, 2025 पर चिंता जताई, चेताया कि IIT और IIM जैसी संस्थाओं की शैक्षणिक स्वतंत्रता और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने संसद में VBSA विधेयक, 2025 को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह बिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) जैसी उच्च शिक्षा संस्थाओं की शैक्षणिक स्वतंत्रता को कमजोर कर सकता है।
जयराम रमेश ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को सरकार द्वारा सीधे नियंत्रित करने वाले प्रावधानों से उनकी निर्णय लेने की क्षमता और प्रशासनिक स्वायत्तता खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि यह विधेयक लागू हुआ, तो IIT और IIM जैसे संस्थानों में शैक्षणिक कार्यक्रम, शोध दिशा और वित्तीय फैसलों में हस्तक्षेप बढ़ सकता है।
सांसद ने अपने भाषण में कहा, "भारत के प्रमुख तकनीकी और प्रबंधन संस्थान स्वतंत्र और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के प्रतीक हैं। VBSA विधेयक के कुछ प्रावधान इनके मूल अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं और संस्थानों की विश्वसनीयता को भी चोट पहुँचा सकते हैं।"
जयराम रमेश ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि विधेयक पर व्यापक विचार-विमर्श और विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही इसे लागू किया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए आवश्यक संशोधन किए जाएं, ताकि उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति पर कोई असर न पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा न केवल शिक्षा जगत में बहस का विषय बनेगा, बल्कि भविष्य में नीति निर्धारण और उच्च शिक्षा में स्वायत्तता के अधिकार पर भी प्रभाव डालेगा।
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