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मथुरा-काशी पर भागवत के बयान से भाजपा सरकार को बचाने की कोशिश: सीपीआई(एम)

सीपीआई(एम) ने कहा कि मोहन भागवत का मथुरा-काशी पर बयान भाजपा सरकार को जनता के गुस्से से बचाने की कोशिश है। पार्टी ने इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ाने वाला बताया।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान की आलोचना की है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मुसलमानों को भाईचारे के लिए मथुरा और काशी की मस्जिदें “त्याग” देनी चाहिए। पार्टी का कहना है कि यह बयान जनता के बीच बढ़ते गुस्से से भाजपा सरकार को बचाने के लिए दिया गया है।

सीपीआई(एम) की पोलित ब्यूरो ने कहा कि ऐसे बयान समाज में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ाने के अलावा किसी और उद्देश्य की पूर्ति नहीं करते। पार्टी का आरोप है कि भाजपा सरकार अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए धार्मिक मुद्दों को हवा दे रही है, और आरएसएस प्रमुख के ये बयान उसी रणनीति का हिस्सा हैं।

पोलित ब्यूरो ने यह भी कहा कि भारत का संविधान सभी धर्मों के लोगों को बराबरी और स्वतंत्रता की गारंटी देता है, और किसी भी धार्मिक स्थल के बारे में इस तरह की टिप्पणी संविधान की भावना के खिलाफ है।

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सीपीआई(एम) नेताओं ने कहा कि सरकार को देश के सामने खड़ी वास्तविक समस्याओं जैसे बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक संकट पर ध्यान देना चाहिए, न कि समाज को धार्मिक आधार पर बांटने वाले मुद्दे उठाने चाहिए। उनका कहना है कि आरएसएस और भाजपा ऐसे बयानों से केवल अपने राजनीतिक हित साध रहे हैं।

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