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उपेन्द्र कुशवाहा ने ठुकराया भाजपा में विलय का प्रस्ताव, दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर बढ़ीं मुश्किलें

उपेन्द्र कुशवाहा ने भाजपा में विलय का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। इसके बाद मंत्री दीपक प्रकाश का पद संकट में पड़ गया है और उनके भविष्य को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

बिहार की राजनीति में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा द्वारा अपनी पार्टी का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय करने से इनकार किए जाने के बाद मंत्री दीपक प्रकाश का पद संकट में पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि नई सरकार के गठन के बाद संवैधानिक रूप से निर्धारित छह महीने की अवधि पूरी होने के बाद दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर बने रहने की संभावना कम है।

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने अपने सहयोगी दलों को मजबूत करने और संगठनात्मक एकीकरण के उद्देश्य से उपेन्द्र कुशवाहा के सामने पार्टी विलय का प्रस्ताव रखा था। हालांकि कुशवाहा ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में बने रहते हुए अपनी पार्टी की स्वतंत्र पहचान बनाए रखने का फैसला किया।

बताया जाता है कि नवंबर 2025 में जब दीपक प्रकाश को पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था, तब भी भाजपा ने इसी तरह का प्रस्ताव कुशवाहा के सामने रखा था। उस समय भी कुशवाहा ने विलय से इनकार कर दिया था, लेकिन भाजपा ने भविष्य में स्थिति बदलने की उम्मीद में दीपक प्रकाश को मंत्री बना दिया था।

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हाल ही में एक पार्टी कार्यक्रम के दौरान उपेन्द्र कुशवाहा ने संकेत दिया कि पार्टी के हित व्यक्तिगत या पारिवारिक हितों से ऊपर हैं। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी भाजपा में विलय नहीं करेगी।

इस बीच, दीपक प्रकाश को अभी तक बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए एनडीए का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है। उन्होंने हाल ही में 18 जून को होने वाले चुनाव के सभी उम्मीदवारों को शुभकामनाएं दीं, लेकिन सीट बंटवारे या गठबंधन संबंधी सवालों पर कोई टिप्पणी करने से बचते रहे।

उल्लेखनीय है कि बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव होने हैं, जिनमें नौ सीटें नियमित द्विवार्षिक चुनाव के तहत और एक सीट पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद रिक्त हुई है।

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