दिल्ली में बारापुल्ला एलिवेटेड कॉरिडोर और मुकरबा अंडरपास जनता के लिए खुले, जानें कैसे कम होगा ट्रैफिक जाम
दिल्ली में बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर और मुकरबा अंडरपास खुलने से सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी मिलेगी। परियोजना से पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बीच यातायात सुगम होने की उम्मीद है।
दिल्ली में बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर और मुकरबा चौक अंडरपास को मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनता के लिए खोल दिया। इस मौके पर दक्षिण दिल्ली में दो नए फ्लाईओवर की आधारशिला भी रखी जाएगी। बारापुल्ला फेज-3 परियोजना को 2014 में मंजूरी मिली थी और इसका निर्माण 2015 में शुरू हुआ था। इसे 2017 तक पूरा किया जाना था, लेकिन कई कारणों से इसमें देरी हुई। परियोजना की संशोधित लागत करीब 1,635 करोड़ रुपये है।
बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर के शुरू होने से मयूर विहार फेज-1 और सराय काले खां के बीच सिग्नल-फ्री संपर्क उपलब्ध होगा। इससे एम्स और दक्षिण दिल्ली की ओर आने-जाने वाले वाहनों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। नया कॉरिडोर मौजूदा बारापुल्ला कॉरिडोर से जुड़ेगा, जिससे दोनों हिस्सों को मिलाकर करीब 9 किलोमीटर लंबा मार्ग तैयार होगा।
परियोजना में एलिवेटेड कॉरिडोर के साथ रैंप और यमुना के ऊपर अतिरिक्त-डोज्ड पुल का निर्माण भी किया गया है। इसमें साइकिल चालकों के लिए अलग साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए सुविधाजनक ढांचा भी शामिल है। परियोजना को दिल्ली में टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देने वाली शहरी आधारभूत संरचना के रूप में देखा जा रहा है।
यमुना के बाढ़ क्षेत्र पर बने पुल की संरचना भी इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। पुल के खंभों के बीच करीब 125 मीटर तक का अंतर रखा गया है, ताकि नदी के सक्रिय क्षेत्र में प्राकृतिक प्रवाह पर कम से कम असर पड़े और निर्माण का पर्यावरणीय प्रभाव घटाया जा सके।
मुकरबा चौक अंडरपास के साथ यह परियोजना दिल्ली के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों के बीच आवागमन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। सिग्नल और व्यस्त जंक्शनों से बचने के कारण वाहनों की आवाजाही अधिक सुचारु होने की उम्मीद है। वहीं, पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए अलग सुविधाएं उपलब्ध होने से सड़क उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प मिलेंगे।
दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों द्वारा सड़क ढांचे को मजबूत करने की दिशा में इन परियोजनाओं को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दक्षिण दिल्ली में प्रस्तावित दो नए फ्लाईओवर भी भविष्य में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में योगदान दे सकते हैं।
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