दिल्ली हाईकोर्ट ने व्यापक मौलिक अधिकारों वाली पीआईएल वापस लेने की अनुमति दी, नए सिरे से दाखिल करने की छूट
दिल्ली हाईकोर्ट ने मौलिक अधिकारों से जुड़ी व्यापक मांगों वाली जनहित याचिका को वापस लेने की अनुमति दी। अदालत ने याचिकाकर्ता को नई याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता दी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यापक मौलिक अधिकारों के क्रियान्वयन को लेकर दायर जनहित याचिका (पीआईएल) को वापस लेने की अनुमति दे दी। अदालत ने कहा कि याचिका में मांगी गई राहतें बहुत व्यापक थीं, इसलिए इसे मौजूदा स्वरूप में स्वीकार करना उचित नहीं होगा।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिका में कई अलग-अलग मुद्दों को शामिल किया गया है, जिसके कारण इसका दायरा अत्यधिक विस्तृत हो गया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को पीआईएल वापस लेने की अनुमति देते हुए नए सिरे से अधिक स्पष्ट और सीमित मुद्दों के साथ याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता प्रदान की।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार समेत कई मौलिक अधिकारों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने अदालत से नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि जनहित याचिका में मांगी गई राहतें इतनी व्यापक हैं कि उन्हें एक ही मामले में तय करना संभव नहीं है। अदालत ने कहा कि किसी विशेष मुद्दे या अधिकार से संबंधित स्पष्ट मांगों के साथ याचिका दायर की जा सकती है।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद याचिकाकर्ता अब संशोधित रूप में नई जनहित याचिका दाखिल कर सकता है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि वर्तमान याचिका वापस लेने से भविष्य में उचित आधार और सीमित मुद्दों के साथ दोबारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाने पर कोई रोक नहीं होगी।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने जनहित याचिकाओं के उद्देश्य और उनके प्रभावी इस्तेमाल पर भी जोर दिया। अदालत ने कहा कि पीआईएल का उपयोग सार्वजनिक महत्व के स्पष्ट मामलों के समाधान के लिए किया जाना चाहिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया प्रभावी तरीके से आगे बढ़ सके।
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