दिल्ली हाईकोर्ट ने नीट-यूजी दोबारा परीक्षा में अनियमितताओं की जांच और एनटीए भंग करने की याचिका ठुकराई
दिल्ली हाईकोर्ट ने नीट-यूजी दोबारा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच और एनटीए भंग करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार किया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने नीट-यूजी दोबारा परीक्षा में अनियमितताओं की जांच की याचिका ठुकराई
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को नीट-यूजी दोबारा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिका में व्यक्तिगत राहत से जुड़े दावों को सभी अभ्यर्थियों के लिए राहत की मांग के साथ मिला दिया गया है। अदालत ने कहा कि इस तरह की याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती।
यह याचिका पहले किसी अन्य अदालत से स्थानांतरित होकर दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची थी और इसे जनहित याचिका के तौर पर लिया जा रहा था। केंद्र सरकार और एनटीए की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोपों को खारिज किया। केंद्र ने नीट दोबारा परीक्षा में किसी भी तरह की अनियमितता या गड़बड़ी से इनकार किया और ओएमआर शीट से छेड़छाड़ के आरोपों को भी निराधार बताया।
और पढ़ें: संसद सुरक्षा चूक मामले में आरोपी धनराज शिंदे की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई
इस बीच, पिछले महीने केंद्रीय जांच ब्यूरो ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इनमें तीन प्रश्नपत्र विशेषज्ञ, कोचिंग संस्थानों से जुड़े दो लोग, बिचौलिए और कुछ लाभार्थी अभ्यर्थी शामिल हैं।
सीबीआई ने विशेष अदालत में दाखिल आरोपपत्र में भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और सबूत नष्ट करने समेत कई आरोप लगाए। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधन रोकथाम अधिनियम, 2024 के तहत भी आरोप लगाए गए।
आरोपपत्र में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। सीबीआई के मुताबिक सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी ने डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट, हस्तलेखन विशेषज्ञों और शैक्षणिक विशेषज्ञों की राय भी रिकॉर्ड में शामिल की है।
सीबीआई को 12 मई को 3 मई को हुई नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की जांच सौंपी गई थी। परीक्षा रद्द कर 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। मामले की जांच के दौरान सीबीआई ने महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और अन्य राज्यों में 92 स्थानों पर छापेमारी की। दो महीने की जांच में एजेंसी ने पेपर लीक के स्रोत से लाभार्थी अभ्यर्थियों तक पूरी कड़ी का पता लगाया।