तुर्कमान गेट हिंसा मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी को दी गई जमानत रद्द की
दिल्ली हाईकोर्ट ने तुर्कमान गेट हिंसा मामले में आरोपी को दी गई जमानत रद्द करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट का आदेश बिना ठोस कारणों के था और मामले पर दोबारा विचार होगा।
दिल्ली हाईकोर्ट ने तुर्कमान गेट हिंसा मामले में एक आरोपी को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई जमानत को रद्द कर दिया। यह मामला इस महीने की शुरुआत में नई दिल्ली के तुर्कमान गेट स्थित फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। यह घटना 6 और 7 जनवरी की दरम्यानी रात की बताई जा रही है।
न्यायमूर्ति प्रतीक जलान ने जमानत आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को दी गई स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करते समय अदालत अत्यंत सावधानी बरतती है, लेकिन यह एक “अपवादात्मक” मामला है। उन्होंने कहा कि उबेदुल्लाह नामक आरोपी, जो पेशे से एक रेहड़ी-पटरी वाला है, को जमानत एक “संक्षिप्त और बिना ठोस कारणों वाले” आदेश के जरिए दी गई थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का जमानत आदेश अभियोजन पक्ष के तर्कों पर समुचित रूप से विचार नहीं करता और जमानत से जुड़े आवश्यक कानूनी मानकों का प्रारंभिक या संक्षिप्त विश्लेषण भी उसमें नहीं किया गया है। इसी आधार पर 21 जनवरी 2026 को पारित आदेश में हाईकोर्ट ने जमानत आदेश को रद्द करते हुए मामले को पुनर्विचार के लिए सत्र अदालत को वापस भेज दिया।
ट्रायल कोर्ट अब आरोपी की जमानत याचिका पर 23 जनवरी 2026 को दोबारा विचार करेगा। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए सीसीटीवी फुटेज और सह-आरोपी के बयान पर भरोसा किया था। इन साक्ष्यों के आधार पर दावा किया गया कि उबेदुल्लाह उस हिंसक भीड़ का हिस्सा था, जिसने पुलिस को ड्यूटी करने से रोका, पथराव किया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
वहीं, आरोपी के वकील ने दलील दी कि उसके मुवक्किल के खिलाफ पूरा मामला “फिशिंग एक्सपीडिशन” यानी बिना ठोस आधार के जांच का प्रयास है।
पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलाई गई थी कि तुर्कमान गेट के सामने स्थित मस्जिद को गिराया जा रहा है, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग वहां एकत्र हो गए। पुलिस ने बताया कि करीब 150 से 200 लोगों ने पुलिस और नगर निगम (एमसीडी) कर्मियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी, जिससे छह पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें इलाके के थाना प्रभारी भी शामिल थे।
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