देश में विकास के साथ ऊंचे और निचले स्तर के बीच का अंतर कम करना जरूरी: मोहन भागवत
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत में विकास हो रहा है, लेकिन ऊंचे और निचले विकास स्तर के बीच अंतर न्यूनतम रखना जरूरी है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि भारत में विकास लगातार हो रहा है, लेकिन विकास के सबसे ऊंचे और सबसे निचले स्तर के बीच का अंतर न्यूनतम रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना जरूरी है।
मोहन भागवत ने विकास की प्रक्रिया में समान अवसर और संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल विकास की गति बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विकास का अंतर बहुत अधिक न हो। उनके अनुसार, देश की समग्र प्रगति तभी सार्थक होगी, जब विकास का लाभ व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचे।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत में विभिन्न क्षेत्रों में विकास हो रहा है और देश आगे बढ़ रहा है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास के ऊपरी और निचले स्तर के बीच मौजूद अंतर को कम करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जाने चाहिए।
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उन्होंने विकास को समाज के सभी हिस्सों से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उनके बयान में यह बात प्रमुख रही कि देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति के साथ-साथ उन लोगों तक भी अवसर और सुविधाएं पहुंचनी चाहिए, जो विकास की प्रक्रिया में अपेक्षाकृत पीछे रह जाते हैं।
भागवत के मुताबिक, विकास का उद्देश्य केवल कुछ क्षेत्रों या वर्गों तक सीमित रहना नहीं होना चाहिए। उन्होंने व्यापक और संतुलित विकास को देश की प्रगति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
आरएसएस प्रमुख का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भारत में आर्थिक विकास, सामाजिक समानता और विभिन्न वर्गों तक विकास के लाभ पहुंचाने को लेकर चर्चा जारी है। उनके वक्तव्य में विकास की उपलब्धियों के साथ उसके समान वितरण पर भी ध्यान देने की जरूरत रेखांकित की गई।
उन्होंने कहा कि देश के विकास की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए, लेकिन साथ ही यह प्रयास भी होना चाहिए कि सबसे अधिक विकसित और सबसे कम विकसित स्तर के बीच की दूरी लगातार घटे।
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