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विविधता को स्वीकारें और सम्मान दें: लंदन में मोहन भागवत ने कर्मभूमि और हिंदू चिंतन पर रखी बात

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने लंदन में विविधता के सम्मान, कर्मभूमि के प्रति निष्ठा और युवाओं पर भरोसे की बात कही। उन्होंने आत्मनिर्भरता और वैश्विक व्यापार को महत्वपूर्ण बताया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को लंदन में आयोजित ‘सेलिब्रेशन ऑफ ऑननेस’ कार्यक्रम में विविधता को स्वीकार करने और उसका सम्मान करने की बात कही। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपनी कर्मभूमि के प्रति पूरी तरह निष्ठावान रहना चाहिए और जिस भूमि पर वह काम करता है, उसके साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए।

भागवत ने कहा कि कर्मभूमि वह स्थान है, जहां व्यक्ति की निष्ठा होती है, जबकि जन्मभूमि उसे मूल्य और संस्कार प्रदान करती है। उन्होंने ‘हिंदू चिंतन’ का उल्लेख करते हुए कहा कि विविधता स्वाभाविक है और इसे स्वीकार करना चाहिए। उनके अनुसार, विविधता अस्तित्व की एकता के अलग-अलग रूपों को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि अगर ब्रिटेन में रहने वाले हिंदुओं के सामने ऐसी स्थिति आती है, जहां निष्ठा को लेकर सवाल हो, तो उनकी कर्मभूमि ब्रिटेन होगी। भागवत ने कहा कि जन्मभूमि या मूल स्थान और पुण्यभूमि से प्राप्त मूल्यों को व्यक्ति को अपनी कर्मभूमि में रहते हुए व्यवहार में उतारना चाहिए और उस भूमि की सेवा करनी चाहिए।

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आरएसएस प्रमुख ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को देशों के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

युवाओं पर पूरा भरोसा

भागवत ने कहा कि उन्हें देश और दुनिया के युवाओं पर पूरा भरोसा है। युवाओं में दुनिया को बेहतर बनाने की इच्छा है, इसलिए उन्हें केवल कोई तरीका बताने के बजाय स्पष्ट लक्ष्य और उद्देश्य दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुभव साझा किए जाएं, लेकिन युवाओं पर अपनी कार्यपद्धति न थोपी जाए। उन्हें अपना रास्ता और लक्ष्य तय करने की स्वतंत्रता मिले तो वे अधिक प्रभावी और तेजी से परिणाम हासिल कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में हर धर्म के लोग गौ रक्षा को स्वीकार करते हैं। आरएसएस के स्वयंसेवकों के बारे में भागवत ने कहा कि वे मानव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं।

मोहन भागवत अमेरिका और कनाडा के बाद अपने तीन देशों के विदेश दौरे के अंतिम चरण में ब्रिटेन पहुंचे थे। लंदन में उन्होंने ऐतिहासिक खालसा जथा ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारा साहिब और श्री स्वामीनारायण मंदिर, विल्सडन का भी दौरा किया।

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