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दक्षिण भारत का राजनीतिक हाशिए पर जाना बर्दाश्त नहीं करेंगे: प्रस्तावित परिसीमन बिल पर डी. के. शिवकुमार

डी. के. शिवकुमार ने प्रस्तावित परिसीमन बिल का विरोध करते हुए कहा कि दक्षिण भारत के साथ राजनीतिक अन्याय और हाशिए पर डालने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने प्रस्तावित परिसीमन (डिलिमिटेशन) बिल को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इस कदम के जरिए दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ राजनीतिक असंतुलन पैदा करने की कोशिश की जा रही है, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

शिवकुमार ने कहा कि केंद्र सरकार एक “राजनीतिक पुनर्गठन” (पॉलिटिकल री-इंजीनियरिंग) की कोशिश कर रही है, जिसका भार दक्षिणी राज्यों को उठाना पड़ सकता है। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि दक्षिण भारत के राज्यों का योगदान देश की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, तकनीक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण रहा है, इसलिए उनके साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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डी. के. शिवकुमार ने कहा कि परिसीमन जैसी प्रक्रिया जनसंख्या और प्रतिनिधित्व के संतुलन को प्रभावित करती है, और इसे सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर ही लागू किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस मुद्दे पर विपक्षी दल एकजुट होकर अपनी चिंता व्यक्त करेंगे और संसद के भीतर तथा बाहर इस पर चर्चा की जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिसीमन बिल को लेकर उत्तर और दक्षिण राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व के संतुलन को लेकर पहले से ही बहस चल रही है, और इस तरह के बयान राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकते हैं।

इस बीच, केंद्र सरकार का कहना है कि परिसीमन प्रक्रिया का उद्देश्य केवल जनसंख्या के आधार पर उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है, न कि किसी क्षेत्र को कमजोर करना।

यह मुद्दा आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति में और अधिक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन सकता है।

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