उच्च मूल्य वाले उत्पादों और नए बाजारों पर ध्यान से निर्यात गति बनाए रखी जा सकती है: आर्थिक सर्वेक्षण
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, उच्च मूल्य वाले उत्पादों, नए बाजारों और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स पर फोकस से भारत की निर्यात गति वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद बनी रह सकती है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारत की निर्यात गति को बनाए रखने के लिए उच्च मूल्य वाले, अधिक परिष्कृत उत्पादों और नए गंतव्यों की ओर रणनीतिक विविधीकरण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि लक्षित औद्योगिक नीतियां, तकनीकी उन्नयन और निर्यात-प्रेरित इकोसिस्टम भारत को वैश्विक व्यापार में दीर्घकालिक लाभ दिला सकते हैं।
सर्वेक्षण के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक व्यापार परिदृश्य एक खंडित और सतर्क दुनिया को दर्शाता है, जहां संरक्षणवादी प्रवृत्तियां आयात को बढ़ावा देने की बजाय प्राथमिकता ले रही हैं। भू-राजनीतिक बदलावों के चलते वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का पुनर्गठन हो रहा है और व्यापारिक संबंध बहुपक्षीय व्यवस्था से हटकर द्विपक्षीय समझौतों की ओर बढ़ रहे हैं।
इस चुनौतीपूर्ण माहौल में भारत के लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) का विस्तार एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साधन बनकर उभरा है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, मुक्त व्यापार समझौतों का बढ़ता नेटवर्क वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय निर्यातकों को विश्वसनीय बाजार पहुंच उपलब्ध कराता है। इससे न केवल पारंपरिक बाजारों में स्थिरता मिलती है, बल्कि उभरते और नए बाजारों में भी भारत की उपस्थिति मजबूत होती है।
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सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि भारत को केवल मात्रा आधारित निर्यात मॉडल से आगे बढ़कर मूल्य आधारित निर्यात रणनीति अपनानी होगी। इसमें उच्च तकनीक, मूल्य वर्धित विनिर्माण, जटिल उत्पादों और सेवाओं पर फोकस शामिल है। साथ ही, अनुसंधान एवं विकास, कौशल विकास और डिजिटल क्षमताओं में निवेश को भी बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
आर्थिक सर्वेक्षण का निष्कर्ष है कि यदि भारत तकनीकी नवाचार, लक्षित औद्योगिक नीतियों और वैश्विक मांग के अनुरूप उत्पाद विविधीकरण को प्राथमिकता देता है, तो वह बदलते वैश्विक व्यापार वातावरण में अपनी निर्यात प्रतिस्पर्धा और गति दोनों को बनाए रख सकता है।
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