एकनाथ शिंदे का इंटरव्यू: मुंबई कोई केक नहीं जिसे टुकड़ों में बांट दिया जाए… ठाकरे चुनाव के बाद मराठियों को भूल जाते हैं
नगर निगम चुनावों से पहले एकनाथ शिंदे ने कहा कि मुंबई बंटने की चीज नहीं है। उन्होंने ठाकरे गुट पर मराठियों को चुनाव बाद भूलने का आरोप लगाया और महायुति से मराठी मेयर का दावा किया।
महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों से ठीक दो दिन पहले राज्य के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने The Indian Witness को दिए एक साक्षात्कार में मुंबई की राजनीति, महायुति गठबंधन, ठाकरे भाइयों के गठजोड़ और भाजपा के साथ अपने संबंधों पर खुलकर बात की। शिंदे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “मुंबई कोई केक नहीं है जिसे टुकड़ों में काटकर अलग-अलग कर दिया जाए।” उनका कहना था कि कुछ नेता चुनाव के समय मराठी अस्मिता की बात करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही मराठियों को भूल जाते हैं।
शिंदे ने ठाकरे भाइयों के गठबंधन को मुंबई में सत्तारूढ़ महायुति के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया, लेकिन साथ ही विश्वास जताया कि मुंबई को महायुति से ही मराठी मेयर मिलेगा। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति का केंद्र मुंबई और महाराष्ट्र के मराठी मानुष के हित हैं और इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
भाजपा नेता अन्नामलाई के मुंबई को लेकर दिए गए विवादित बयान पर शिंदे ने नाराज़गी जाहिर की। उन्होंने कहा, “अन्नामलाई ने जो कहा, वह गलत था। मैंने यह बात साफ तौर पर भाजपा नेतृत्व तक पहुंचा दी है।” शिंदे के मुताबिक, मुंबई की संवेदनशीलता और मराठी भावना को लेकर किसी भी तरह की टिप्पणी स्वीकार्य नहीं हो सकती।
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शिवसेना और भाजपा के रिश्तों पर पूछे गए सवाल के जवाब में शिंदे ने कहा कि कुछ समय पहले उतार-चढ़ाव जरूर रहा, लेकिन अब महायुति पूरी मजबूती से साथ खड़ी है। उन्होंने सरकार के कामकाज का बचाव करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार ने विकास, बुनियादी ढांचे और शहरी प्रशासन के क्षेत्र में ठोस काम किया है।
शिंदे ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दल केवल सत्ता के लिए अवसरवादी गठबंधन कर रहे हैं, जबकि महायुति का उद्देश्य स्थिर सरकार और विकास है। उनके मुताबिक, आने वाले चुनावों में जनता विकास और भरोसे की राजनीति को चुनेगी।
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