हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में जयपुर कूच कर रहे किसानों का मार्च हंगामे के बाद वापस लिया गया
हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में किसानों का जयपुर मार्च कई घंटे चले हंगामे के बाद वापस लिया गया, लेकिन किसानों ने मुआवजा और अन्य मांगों पर संघर्ष जारी रखने का संकेत दिया।
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के संयोजक और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में जयपुर की ओर बढ़ रहा किसानों का मार्च बुधवार (14 जनवरी 2026) सुबह कई घंटों तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद वापस ले लिया गया। श्री बेनीवाल मंगलवार (13 जनवरी 2026) को सैकड़ों वाहनों के काफिले के साथ अपने समर्थकों और किसानों के साथ जयपुर के लिए रवाना हुए थे।
इस मार्च के दौरान रास्ते में तनावपूर्ण हालात देखने को मिले, जहां प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत और दबाव का दौर चला। अंततः स्थिति को देखते हुए किसानों के जयपुर कूच को स्थगित करने का फैसला किया गया। इसके बाद श्री बेनीवाल ने कहा कि नागौर जिले के रियां बड़ी में दिया गया धरना सरकार तक एक “ऐतिहासिक संदेश” पहुंचाने में सफल रहा है।
किसानों की प्रमुख मांगों में नागौर जिले में रेलवे लाइन और हाई-टेंशन बिजली ट्रांसमिशन लाइन परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई भूमि का उचित मुआवजा, फसल बीमा राशि का शीघ्र भुगतान, अवैध बजरी खनन पर रोक और पूर्व आंदोलनों के दौरान दर्ज पुलिस मामलों की वापसी शामिल थी। किसानों का कहना था कि लंबे समय से उनकी शिकायतें लंबित हैं और सरकार उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रही है।
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राज्य की भाजपा सरकार के मुखर आलोचक रहे हनुमान बेनीवाल ने आरोप लगाया कि किसानों की जायज मांगों को लगातार टाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि रियां बड़ी में हुए धरने और प्रस्तावित जयपुर मार्च के जरिए सरकार को यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
मार्च के वापस लिए जाने के बावजूद किसान संगठनों ने संकेत दिए हैं कि वे अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और वार्ता की पहल पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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