मणिपुर में बीएसएफ शिविर में फूड पॉइजनिंग की आशंका, 81 जवानों समेत 84 लोग अस्पताल में भर्ती
मणिपुर में नाश्ते के बाद फूड पॉइजनिंग की आशंका से 81 बीएसएफ जवानों समेत 84 लोग अस्पताल पहुंचे। इसी बीच सुरक्षा बलों ने जबरन वसूली के आरोप में दो संदिग्ध उग्रवादियों को गिरफ्तार किया।
मणिपुर की राजधानी इम्फाल में गुरुवार को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के शिविर में नाश्ते के बाद फूड पॉइजनिंग की आशंका से हड़कंप मच गया। उल्टी और जी मिचलाने की शिकायत के बाद 81 बीएसएफ जवानों और तीन नागरिकों समेत कुल 84 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। सभी को तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई और उनकी हालत स्थिर बताई गई है।
अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित लोगों को दोपहर करीब एक बजे क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (आरआईएमएस), इम्फाल ले जाया गया। अस्पताल के आपातकालीन विभाग में सभी मरीजों का उपचार किया गया। आरआईएमएस के एक अधिकारी ने बताया कि मरीजों के बीमार पड़ने की वजह फूड पॉइजनिंग होने की आशंका है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार बीमारी का सटीक कारण अभी सामने नहीं आया है।
यह भी स्पष्ट नहीं है कि सभी प्रभावित लोगों ने एक ही भोजन किया था या नहीं। भोजन के नमूनों की जांच और घटना की विस्तृत जांच को लेकर भी आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
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मणिपुर में दो संदिग्ध उग्रवादी गिरफ्तार
इस बीच, मणिपुर में सुरक्षा बलों ने जबरन वसूली की गतिविधियों में कथित संलिप्तता के आरोप में प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े दो लोगों को अलग-अलग अभियानों में गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, मंगलवार, 13 अक्टूबर को राज्य पुलिस कमांडो की टीम ने इम्फाल पश्चिम जिले के सिंगजामेई इलाके में कार्रवाई कर 39 वर्षीय अहोंगशांगबम पिंकुमणि सिंह को गिरफ्तार किया। उस पर प्रतिबंधित पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलेइपाक (प्रेपाक) का सक्रिय सदस्य होने का आरोप है।
दूसरी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने बिष्णुपुर जिले के क्वाक्टा इलाके से 60 वर्षीय मोहम्मद अब्दुल हकीम को पकड़ा। पुलिस के अनुसार, उसका संबंध प्रतिबंधित कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी (वांगलेन) से होने और इलाके में जबरन वसूली में शामिल होने का संदेह है।
जातीय हिंसा के बीच सुरक्षा अभियान जारी
पुलिस ने बताया कि मई 2023 में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से राज्य में तलाशी अभियान और गश्त जारी है। इस संघर्ष में 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। संभावित हिंसा की आशंका के बीच केंद्र ने मणिपुर के कई क्षेत्रों को सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (अफस्पा) के तहत छह महीने के लिए अशांत क्षेत्र घोषित किया है।
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