बगहा में गंडक नदी का तटबंध टूटा, रिहायशी इलाकों में तेजी से फैल रहा बाढ़ का पानी
बगहा में गंडक नदी के तेज बहाव से चखनी-खैरटवा के पास चंपारण तटबंध टूट गया। 5.43 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद रिहायशी इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा।
बिहार के बगहा में गंडक नदी के उफान के बीच चंपारण तटबंध का एक हिस्सा टूट गया है। चखनी-खैरटवा के पास तटबंध टूटने के बाद नदी का पानी तेजी से रिहायशी इलाकों की ओर फैल रहा है। इससे आसपास के लोगों में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
सोमवार सुबह वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से करीब 5.43 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। भारी मात्रा में पानी के डिस्चार्ज के बाद पहले से ही एहतियाती कदम उठाए जा रहे थे। इसके बाद नदी का प्रवाह तेज होने से चखनी-खैरटवा में तटबंध टूट गया। जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता नेमी शरण ने तटबंध टूटने की पुष्टि की है।
तटबंध टूटने के बाद बाढ़ का पानी तेजी से आसपास के रिहायशी क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। प्रशासन की टीमें पानी के फैलाव को नियंत्रित करने और प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने के लिए जरूरी कदम उठा रही हैं। स्थानीय लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की जा रही है।
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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को वैशाली, सारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने डुमरिया घाट पर गंडक नदी के बढ़े जलस्तर का स्थल निरीक्षण भी किया और अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने संवेदनशील और निचले इलाकों की लगातार निगरानी करने तथा राहत कार्यों में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने को कहा। उन्होंने जल संसाधन विभाग को तटबंधों की लगातार निगरानी और रात में गश्त करने के निर्देश भी दिए।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि डुमरिया घाट के पास गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से करीब डेढ़ मीटर ऊपर है और रात में इसमें लगभग 50 सेंटीमीटर की और वृद्धि की संभावना है।
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