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असम से तमिलनाडु पांच हाथियों के स्थानांतरण पर रोक लगाने से हाई कोर्ट का इनकार

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम से तमिलनाडु पांच हाथियों के स्थानांतरण पर फिलहाल रोक नहीं लगाई। अदालत ने आवश्यक मंजूरियों और हाथियों की सुरक्षा को लेकर जवाब मांगा।

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम से तमिलनाडु के मंदिरों में पांच पालतू हाथियों के स्थानांतरण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि फिलहाल रोक लगाने का कोई आधार नहीं है, जब तक यह साबित न हो कि जरूरी नियामकीय मंजूरियां नहीं ली गई हैं।

मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार और न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि हाथियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखना जरूरी है। अदालत ने असम के अतिरिक्त महाधिवक्ता को अगली सुनवाई तक आवेदन पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

अदालत रोहित चौधरी की ओर से दायर अंतरिम आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। यह आवेदन एक रिट याचिका से जुड़ा है, जिसमें वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 40(2ए) और 40(2बी) के प्रावधानों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन प्रावधानों के कारण बंदी हाथियों के स्वामित्व, नियंत्रण, अभिरक्षा और कब्जे को लेकर असाधारण व्यवस्था बनती है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

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अदालत ने कहा कि संबंधित वैधानिक संस्थाओं से मंजूरी मिलने की स्थिति में हाथियों के स्थानांतरण पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं है। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई थी कि पहले जयमाला’ नामक हाथी के तमिलनाडु में निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रहने का मामला सामने आया था और इससे स्थानांतरित हाथियों के साथ दुर्व्यवहार की संभावना हो सकती है।

असम के अतिरिक्त महाधिवक्ता पी.एन. गोस्वामी ने अदालत को बताया कि पांचों हाथियों को तमिलनाडु के मंदिरों में भेजने के लिए सभी आवश्यक मंजूरियां मिल चुकी हैं और धार्मिक उद्देश्यों के लिए उनके सुरक्षित परिवहन की पूरी व्यवस्था की जाएगी।

मामला हाई पावर कमेटी के समक्ष भी लंबित है। अदालत ने अब रिट याचिका और अंतरिम आवेदन को 15 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

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