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जनरल एम एम नरवणे की अप्रकाशित किताब पर सियासी घमासान, संसद में गतिरोध जारी

जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब के अंशों को लेकर विपक्ष और सरकार में टकराव बढ़ा। चीन गतिरोध मुद्दे पर संसद में हंगामा, कार्यवाही बाधित और राजनीतिक विवाद तेज।

पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (सेवानिवृत्त) एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। उनकी अप्रकाशित आत्मकथा को लेकर संसद में तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है, जिसके कारण संसद की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है। गुरुवार को लोकसभा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही पारित कर दिया, जो मौजूदा गतिरोध की गंभीरता को दर्शाता है।

विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस विवाद के केंद्र में हैं। वे जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब के कुछ हिस्सों का हवाला देते हुए सरकार पर पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ 2020 के सैन्य गतिरोध को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने इस मुद्दे पर संसद और देश को पूरी जानकारी नहीं दी।

जनरल नरवणे दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारतीय सेना के प्रमुख रहे। उनके कार्यकाल को हाल के इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण दौरों में से एक माना जाता है। इसी दौरान भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लंबा सैन्य तनाव चला, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति को लेकर व्यापक बहस को जन्म दिया।

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उनके नेतृत्व में सेना ने न केवल सीमा पर तनावपूर्ण स्थिति का सामना किया, बल्कि कई महत्वपूर्ण सैन्य और प्रशासनिक सुधार भी लागू किए। उनके कार्यकाल में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अग्निपथ’ योजना को लागू किया गया, जिसका उद्देश्य सेना में भर्ती प्रक्रिया को आधुनिक और युवा बनाना था।

जनरल नरवणे की किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, लेकिन इसके कथित अंशों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, जिससे संसद की कार्यवाही प्रभावित हो रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है।

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