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विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल की अर्थव्यवस्था को पर्यटन कैसे दे सकता है नई ताकत?

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद पर्यटन आर्थिक पुनर्बहाली का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार जिम्मेदार यात्राएं रोजगार, विदेशी मुद्रा और स्थानीय समुदायों की आजीविका को सहारा देंगी।

26 अगस्त 2026 को नेपाल में ऊंचाई वाले क्षेत्र में ग्लेशियर के ढहने से ल्हेंडे खोला और भोटे कोशी नदी तंत्र में अचानक विनाशकारी बाढ़ आ गई। इस आपदा में कई लोगों की जान गई, बड़ी संख्या में लोग लापता हुए और क्षेत्र के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। इस घटना ने हिमालयी क्षेत्र की जलवायु संवेदनशीलता को एक बार फिर दुनिया के सामने ला दिया है।

ग्यिरोंग पोर्ट और रसुवागढ़ी जैसे महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों के क्षतिग्रस्त होने, जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान और जनहानि के बीच नेपाल के सामने आर्थिक पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती है। ऐसे समय में पर्यटन देश की अर्थव्यवस्था को दोबारा गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

नेपाल की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का बड़ा योगदान है। यह क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को रोजगार देता है। तीर्थयात्रा, पर्वतीय पर्यटन, ट्रेकिंग और प्राकृतिक सुंदरता के कारण दुनिया भर से पर्यटक नेपाल पहुंचते हैं। पर्यटन देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 7 प्रतिशत का प्रत्यक्ष योगदान देता है और विदेशी मुद्रा, कर राजस्व तथा रोजगार का महत्वपूर्ण स्रोत है।

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नेपाल पर्यावरण अनुसंधान संस्थान के निदेशक और वरिष्ठ अर्थशास्त्री शशि कांत चौधरी के अनुसार, पर्यटकों का खर्च होटल, रेस्तरां, परिवहन, गाइड, किसानों, कारीगरों और स्थानीय कारोबारियों तक पहुंचता है। इससे सरकार को अतिरिक्त राजस्व और विदेशी मुद्रा मिलती है, जिसका इस्तेमाल आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण में किया जा सकता है।

त्रिभुवन विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर रमेश राज पंत ने भी पर्यटन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, रसुवागढ़ी मार्ग चीन और कैलाश-मानसरोवर यात्रा का महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है। बाढ़ से नुकसान के बावजूद पर्यटन को बनाए रखना ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को जीवित रखने के लिए जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल की आपदा की तस्वीरों से पूरे नेपाल को असुरक्षित मानना उचित नहीं होगा। पोखरा, चितवन, लुंबिनी, पशुपतिनाथ, एवरेस्ट क्षेत्र और अन्नपूर्णा सर्किट जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल सामान्य रूप से पर्यटकों का स्वागत कर रहे हैं।

अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने भी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से नेपाल को केवल आपदा की नजर से न देखने की अपील की है। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत समेत पड़ोसी देशों के पर्यटकों की जिम्मेदार यात्राएं स्थानीय लोगों की आजीविका बहाल करने में सीधा योगदान दे सकती हैं।

नेपाल में दुनिया की 8 सबसे ऊंची 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली चोटियां हैं। पशुपतिनाथ और लुंबिनी जैसे धार्मिक स्थल भी वैश्विक महत्व रखते हैं। इसलिए पर्यटन को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के साथ नेपाल, भारत और चीन को बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली, नदी बेसिन प्रबंधन और ग्लेशियल झील विस्फोटक बाढ़ की निगरानी पर मिलकर काम करना होगा।

आपदा के बाद नेपाल की वापसी में मजबूत बुनियादी ढांचे, क्षेत्रीय सहयोग और जिम्मेदार अंतरराष्ट्रीय पर्यटन की अहम भूमिका होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटन का प्रवाह जारी रहना नेपाल की आर्थिक और सामाजिक पुनर्बहाली को मजबूत कर सकता है।

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