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पश्चिम बंगाल के प्रस्तावित एंटी-क्राइम बिल को हुमायूं कबीर का समर्थन, बोले- जनहित के हर कानून के साथ हूं

एयूजेपी विधायक हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल के प्रस्तावित एंटी-क्राइम बिल का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था मजबूत करने वाले हर कानून के साथ रहेंगे।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। ऑल यूनाइटेड डेवलपमेंट पार्टी (एयूजेपी) के विधायक हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा प्रस्तावित एंटी-क्राइम बिल का समर्थन करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जनता के हित, कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और अपराध पर नियंत्रण के उद्देश्य से कोई कानून लाती है, तो वह उसका समर्थन करेंगे।

हुमायूं कबीर का यह बयान उस समय आया है, जब राज्य सरकार विधानसभा में पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक (West Bengal Public Safety and Control of Anti-Social Activities Bill) पेश करने की तैयारी कर रही है। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में अपराधियों, संगठित गिरोहों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।

हुमायूं कबीर ने कहा कि राजनीति से ऊपर उठकर जनता की सुरक्षा और राज्य में शांति बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी यदि जनता के कल्याण के लिए कोई विधेयक लाते हैं तो वह उसका समर्थन करेंगे।

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प्रस्तावित विधेयक को मौजूदा विधानसभा सत्र के सबसे महत्वपूर्ण कानूनों में से एक माना जा रहा है। हालांकि, इसके विस्तृत प्रावधानों पर अभी सदन में चर्चा होनी बाकी है। माना जा रहा है कि इस कानून के लागू होने के बाद पुलिस और प्रशासन को अपराध तथा असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए अधिक कानूनी अधिकार मिल सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कानून-व्यवस्था का मुद्दा लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति का प्रमुख विषय रहा है। ऐसे में सत्तापक्ष से बाहर के किसी विधायक का इस विधेयक के समर्थन में आना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और विधानसभा में होने वाली बहस को नई दिशा दे सकता है।

इसी बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार आगामी दिनों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक भी विधानसभा में पेश कर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो राज्य में पहचान, समानता, धर्मनिरपेक्षता और व्यक्तिगत कानूनों को लेकर व्यापक राजनीतिक बहस छिड़ने की संभावना है।

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