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IIT गुवाहाटी में रु-टैग के 20 वर्ष पूरे, ग्रामीण तकनीक में बड़ा योगदान

आईआईटी गुवाहाटी के रु-टैग कार्यक्रम ने 20 वर्ष पूरे किए, जो उत्तर-पूर्व भारत में ग्रामीण तकनीक और आजीविका सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी ने ग्रामीण तकनीक विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल रु-टैग (Rural Technology Action Group) के 20 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर संस्थान ने उत्तर-पूर्व भारत में ग्रामीण नवाचार और आजीविका सुधार में इस पहल के योगदान को याद किया।

रु-टैग की स्थापना 12 अप्रैल 2006 को आईआईटी गुवाहाटी में की गई थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोगी और सस्ती तकनीकों का विकास करना था, जिससे किसानों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को सीधा लाभ मिल सके।

पिछले दो दशकों में इस पहल ने ग्रामीण समुदायों के लिए कई व्यावहारिक तकनीकी समाधान विकसित किए हैं, जिनका उपयोग कृषि, हस्तशिल्प, ऊर्जा और स्थानीय उद्योगों में किया गया है। इससे न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ी है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

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संस्थान के अधिकारियों के अनुसार, रु-टैग ने स्थानीय समस्याओं को समझकर उनके लिए वैज्ञानिक समाधान तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है। इस पहल ने उत्तर-पूर्व भारत के कई दूरदराज़ क्षेत्रों में तकनीकी पहुंच को मजबूत किया है।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि ग्रामीण विकास के लिए तकनीक का सही उपयोग बेहद जरूरी है और रु-टैग जैसी पहलें भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

आईआईटी गुवाहाटी ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में इस कार्यक्रम को और विस्तार दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों तक नवाचार और तकनीक पहुंचाई जा सके।

इस अवसर पर शोधकर्ताओं और छात्रों ने भी अपने अनुभव साझा किए और ग्रामीण विकास में तकनीक की भूमिका पर चर्चा की।

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