पीएम के संभावित इज़रायल दौरे से पहले भारत का संतुलन साधने का प्रयास, अरब विदेश मंत्रियों की मेजबानी
पीएम मोदी के संभावित इज़रायल दौरे से पहले भारत ने अरब विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित कर संतुलित कूटनीति अपनाई, जिसमें गाज़ा पुनर्निर्माण और क्षेत्रीय शांति पर चर्चा होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस महीने के अंत में संभावित इज़रायल दौरे से पहले भारत पश्चिम एशिया में एक संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाते हुए अरब देशों से संवाद को मजबूत कर रहा है। इसी क्रम में भारत शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 को दूसरी भारत–अरब विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी कर रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक में फिलिस्तीन की विदेश मंत्री वार्सेन अगाबेकियन शाहीन भी शामिल होंगी।
बैठक से एक दिन पहले फिलिस्तीनी विदेश मंत्री ने भारत से युद्ध से तबाह गाज़ा पट्टी के व्यापक पुनर्निर्माण में योगदान देने की अपील की थी। गाज़ा में जारी संघर्ष के कारण बुनियादी ढांचा, आवास और मानवीय सुविधाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं, ऐसे में फिलिस्तीन भारत से सक्रिय भूमिका निभाने की उम्मीद कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, भारत इस बैठक के दौरान इज़रायल और अरब देशों, दोनों के साथ ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (शांति पहल) से जुड़े निमंत्रण पर चर्चा कर सकता है। भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद का समर्थक रहा है और इसी नीति के तहत वह सभी पक्षों से संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इज़रायल की यात्रा की योजना बना रहे हैं। इसके साथ ही इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भारत का लंबित दौरा भी प्रस्तावित है। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी अगले महीने के अंत में तेल अवीव और यरुशलम की यात्रा कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अरब विदेश मंत्रियों की बैठक और संभावित इज़रायल दौरा भारत की उस रणनीति को दर्शाता है, जिसके तहत वह इज़रायल के साथ मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को बनाए रखते हुए फिलिस्तीन और अरब देशों के साथ भी अपने ऐतिहासिक और कूटनीतिक रिश्तों को संतुलित कर रहा है।
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