ब्रिक्स नेटवर्क विश्वविद्यालय बैठक की मेजबानी कर भारत ने उच्च शिक्षा सहयोग को दी नई दिशा
ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत भारत ने ब्रिक्स नेटवर्क विश्वविद्यालय की बैठक आयोजित कर उच्च शिक्षा, अनुसंधान, पारंपरिक ज्ञान, नवाचार और सदस्य देशों के बीच शैक्षणिक सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया।
ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत भारत ने ब्रिक्स नेटवर्क विश्वविद्यालय (ब्रिक्स एनयू) के अंतरराष्ट्रीय संचालन बोर्ड (आईजीबी) की बैठक और पारंपरिक एवं स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर ब्रिक्स नेटवर्क विश्वविद्यालय सम्मेलन की सफल मेजबानी की। इस आयोजन के माध्यम से भारत ने ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और शैक्षणिक सहयोग को और अधिक सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में ब्रिक्स देशों के सरकारी प्रतिनिधि, विश्वविद्यालयों के प्रमुख, शिक्षाविद और विशेषज्ञ शामिल हुए। इस दौरान उच्च शिक्षा में सहयोग बढ़ाने, संस्थागत साझेदारी विकसित करने, संयुक्त अनुसंधान को प्रोत्साहित करने और नवाचार को नई गति देने जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
21 जुलाई को आयोजित अंतरराष्ट्रीय संचालन बोर्ड की वर्चुअल बैठक का उद्घाटन शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. के. एम. प्रफुल्लचंद्र शर्मा ने किया। इस अवसर पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के डीन प्रोफेसर सुदर्शन कुमार ने ब्रिक्स नेटवर्क विश्वविद्यालय की गतिविधियों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने संस्थागत नेटवर्क के विस्तार, सदस्य विश्वविद्यालयों के बीच बढ़ते सहयोग और संयुक्त शैक्षणिक पहलों की जानकारी साझा की। विभिन्न सदस्य देशों ने भी पिछले एक वर्ष के दौरान उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हुए सहयोग और उपलब्धियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया।
और पढ़ें: जनकल्याण को हर सुधार का केंद्र बनाना होगा: उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
बैठक में ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात और भारत के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने देशों में उच्च शिक्षा से जुड़ी राष्ट्रीय पहलों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा किया। सभी देशों ने संयुक्त अनुसंधान, ज्ञान के आदान-प्रदान, शैक्षणिक साझेदारी और संस्थागत सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।
इस आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में पारंपरिक एवं स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर आयोजित सम्मेलन के निष्कर्षों की प्रस्तुति रही। ब्रिक्स नेटवर्क विश्वविद्यालय के अंतर्गत अपनी तरह का यह पहला सम्मेलन था। इसमें पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान के दस्तावेजीकरण, संरक्षण तथा जिम्मेदारीपूर्ण डिजिटल प्रसार पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही नैतिक प्रशासन, समुदायों के अधिकार, समान लाभ-साझेदारी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के जिम्मेदार उपयोग पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
सम्मेलन के दौरान इस क्षेत्र में शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत भी तैयार किए गए। इन्हीं सिफारिशों के आधार पर भारत ने ब्रिक्स नेटवर्क विश्वविद्यालय के अंतर्गत ‘पारंपरिक एवं स्वदेशी ज्ञान प्रणालियां’ को एक नए अंतरराष्ट्रीय विषयगत समूह के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव रखा।
भारत के इस प्रस्ताव को सदस्य देशों का व्यापक समर्थन मिला, जिसे ब्रिक्स उच्च शिक्षा सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सदस्य देशों ने प्रस्ताव और उससे जुड़े अवधारणा-पत्र पर आगे भी विचार-विमर्श जारी रखने पर सहमति जताई।
बैठक में वर्ष 2025-2028 की ब्रिक्स नेटवर्क विश्वविद्यालय कार्ययोजना की समीक्षा भी की गई। इसके अलावा नए ब्रिक्स नेटवर्क विश्वविद्यालय पोर्टल के विकास, संस्थागत सहयोग को बढ़ाने, छात्रों और शिक्षकों की शैक्षणिक गतिशीलता को प्रोत्साहित करने तथा संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। विस्तृत विचार-विमर्श के बाद अंतरराष्ट्रीय संचालन बोर्ड की घोषणा को भी सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
बैठक के समापन पर सभी सदस्य देशों ने उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के साझा उद्देश्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारत ने सभी सहभागी प्रतिनिधिमंडलों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 की थीम "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के निर्माण" के अनुरूप शैक्षणिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास करता रहेगा।
और पढ़ें: नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने अनुराग जैन, केंद्र सरकार ने जारी किया नियुक्ति आदेश