×
 

भारत–यूरोपीय संघ ने मदर ऑफ ऑल डील्स पर बातचीत पूरी की, 2007 से चली वार्ता का हुआ समापन

भारत और यूरोपीय संघ ने 2007 से चली एफटीए वार्ता पूरी की। समझौते से भारतीय निर्यात पर लगभग सभी शुल्क खत्म होंगे और द्विपक्षीय व्यापार को नई गति मिलेगी।

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर वर्षों से चली आ रही बातचीत को आखिरकार पूरा कर लिया है। मंगलवार, 27 जनवरी 2026, को दोनों पक्षों ने आधिकारिक रूप से घोषणा की कि एफटीए पर वार्ता सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। इस समझौते को नीति-निर्माताओं और व्यापार विशेषज्ञों ने मदर ऑफ ऑल डील्स’ की संज्ञा दी है, क्योंकि इसका दायरा, प्रभाव और आर्थिक महत्व बेहद व्यापक माना जा रहा है।

इस एफटीए पर बातचीत की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी, लेकिन कई संवेदनशील और विवादित मुद्दों के कारण यह प्रक्रिया बार-बार ठहराव का शिकार होती रही। वर्ष 2013 के बाद वार्ता लगभग रुक गई थी। बाद में 2022 में दोनों पक्षों ने दोबारा बातचीत शुरू की और इस बार उन विषयों को बाहर रखने पर सहमति जताई, जिन पर सहमति बनना कठिन साबित हो रहा था। इसी व्यावहारिक दृष्टिकोण ने समझौते का रास्ता साफ किया।

समझौते के तहत, यूरोपीय संघ भारत से निर्यात होने वाले 99.5 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क समाप्त करेगा। इनमें से अधिकांश वस्तुओं पर एफटीए लागू होते ही शून्य प्रतिशत (0%) शुल्क लागू हो जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में बड़ी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की उम्मीद है, खासकर टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पादों और कृषि आधारित वस्तुओं के क्षेत्र में।

और पढ़ें: भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता: मदर ऑफ ऑल डील्स

वहीं दूसरी ओर, भारत ने ईयू के साथ होने वाले कुल व्यापार मूल्य के 97.5 प्रतिशत हिस्से पर शुल्क में रियायत देने पर सहमति जताई है। सरकार का मानना है कि यह समझौता भारत के विनिर्माण, निवेश और रोजगार सृजन को गति देगा, साथ ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा।

करीब दो दशकों बाद पूरा हुआ यह समझौता भारत–ईयू संबंधों में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है।

और पढ़ें: प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर की घोषणा की

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share