भारत-यूरोपीय संघ अगले सप्ताह सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर करेंगे: काजा कालास
भारत और यूरोपीय संघ अगले सप्ताह समुद्री, साइबर और आतंकवाद-रोधी सहयोग पर नई सुरक्षा-रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर करेंगे, जिससे रणनीतिक और आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।
भारत और यूरोपीय संघ (ई.यू.) ने समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से एक नई सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर सहमति जताई है। यूरोपीय संघ की शीर्ष राजनयिक काजा कालास ने बुधवार (21 जनवरी, 2026) को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि इस साझेदारी पर अगले सप्ताह हस्ताक्षर किए जाएंगे।
यह समझौता ऐसे समय में किया जा रहा है जब वैश्विक सुरक्षा चुनौतियाँ तेजी से बदल रही हैं और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता व मुक्त नौवहन का महत्व बढ़ता जा रहा है। प्रस्तावित साझेदारी के तहत समुद्री डोमेन जागरूकता, साइबर खतरों से निपटने, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा तथा आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ सहयोग को नई दिशा मिलेगी।
काजा कालास ने कहा कि यूरोपीय संघ, भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और भारत को यूरोप की आर्थिक मजबूती और लचीलापन बनाए रखने के लिए “अनिवार्य” बताया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक विश्वास और साझा मूल्यों के आधार पर सहयोग लगातार गहरा हो रहा है।
यह साझेदारी यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की भारत यात्रा के दौरान औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित की जाएगी। दोनों नेता भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 16वें भारत-ई.यू. शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे।
कालास ने बताया कि यात्रा की तैयारियाँ अच्छी तरह आगे बढ़ रही हैं, हालांकि इसमें कुछ चुनौतियाँ भी हैं। इसके बावजूद, भारत-ई.यू. संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की दिशा में यह समझौता एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा सहयोग को मजबूत करेगा।
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