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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेनसेट का ट्रायल सफल, रेलवे के हरित भविष्य की ओर बड़ा कदम

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेनसेट का ट्रायल सफल रहा। यह हरित परिवहन की दिशा में बड़ा कदम है और जल्द ही हरियाणा में इसका संचालन शुरू होगा।

भारत ने स्वच्छ और हरित परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेनसेट का ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इस परीक्षण को रिसर्च डिज़ाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) द्वारा किया गया, जो ट्रेन की तकनीकी क्षमता और स्थिरता का आकलन करने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि यह परियोजना भारतीय रेलवे के लिए एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि इस ट्रेनसेट का डिज़ाइन और निर्माण प्रारंभिक चरण से लेकर प्रोटोटाइप तैयार करने तक पूरी तरह देश में ही किया गया है। यह पहली बार है जब भारतीय रेलवे में हाइड्रोजन आधारित ट्रैक्शन तकनीक विकसित की गई है।

यह हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलाई जाएगी। इसे चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने विकसित किया है। इस ट्रेन के संचालन से भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जहां हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेनें पहले से संचालित हो रही हैं, जैसे जर्मनी, स्वीडन, जापान और चीन।

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हाइड्रोजन ट्रेनें पर्यावरण के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती हैं, क्योंकि इनमें कार्बन उत्सर्जन नहीं होता और ये केवल जलवाष्प छोड़ती हैं। इससे वायु प्रदूषण में कमी आएगी और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा मिलेगा।

इस उपलब्धि को भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस तकनीक का विस्तार देश के अन्य हिस्सों में भी किया जा सकता है।

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