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पश्चिम एशिया संकट पर भारत-ईरान वार्ता तेज, विदेश मंत्रियों के बीच अहम बातचीत

भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों ने पश्चिम एशिया संकट पर बातचीत की। दोनों देशों ने युद्धविराम, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक सहयोग को लेकर संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक संवाद तेज हो गया है। बुधवार को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई। इस बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा, युद्धविराम की स्थिति, द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट की गंभीरता को समझते हुए संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई। ईरानी दूतावास ने भी पुष्टि की कि बातचीत के दौरान हालिया घटनाक्रम, विशेषकर युद्धविराम से जुड़े पहलुओं और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर विचार-विमर्श हुआ।

बताया जा रहा है कि अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंध और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर ईरान के नियंत्रण जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। इन घटनाओं का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित है।

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इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री अराघची रूस, ओमान और पाकिस्तान का दौरा कर चुके हैं, जहां उन्होंने क्षेत्रीय शांति के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुई शांति वार्ता किसी ठोस परिणाम तक नहीं पहुंच सकी।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की भूमिका इस संकट में संतुलन बनाने और संवाद को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण हो सकती है। भारत दोनों पक्षों के साथ बेहतर संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, ताकि क्षेत्र में स्थिरता कायम की जा सके।

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