भारत-जापान UNICORN रक्षा समझौता: भारतीय नौसेना के लिए स्टील्थ टेक्नोलॉजी में बड़ा कदम
भारत और जापान ने UNICORN रक्षा प्रणाली पर सह-विकास समझौता किया है, जिससे भारतीय नौसेना की स्टील्थ और संचार क्षमता मजबूत होगी। यह दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का बड़ा कदम है।
भारत और जापान ने रक्षा सहयोग के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू करते हुए भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना (UNICORN) मास्ट के सह-विकास पर सहमति जताई है। यह समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
UNICORN, जिसका पूरा नाम Unified Complex Radio Antenna है, एक आधुनिक एकीकृत संचार प्रणाली है जिसमें कई अलग-अलग एंटेना को एक ही सुव्यवस्थित ढांचे में समाहित किया जाता है। पारंपरिक युद्धपोतों में अलग-अलग एंटेना बाहर लगे होते हैं, जिससे रडार पर उनकी पहचान आसान हो जाती है। लेकिन UNICORN सिस्टम में सभी संचार उपकरण एक बंद ढांचे में होते हैं, जिससे जहाज की रडार पहचान क्षमता (Radar Signature) काफी कम हो जाती है और स्टील्थ क्षमता बढ़ती है।
यह तकनीक पहले से ही जापान के मोगामी-क्लास फ्रिगेट्स में इस्तेमाल हो रही है और इसे अत्याधुनिक नौसैनिक संचार प्रणाली माना जाता है।
भारतीय नौसेना के लिए यह तकनीक कई मायनों में महत्वपूर्ण है—
यह जहाजों की रडार पर दृश्यता कम करेगी, संचार प्रणालियों को एकीकृत करेगी, इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेरेंस घटाएगी और रखरखाव को आसान बनाएगी। इससे युद्ध स्थितियों में जहाजों की सुरक्षा और प्रभावशीलता दोनों बढ़ेंगी।
यह परियोजना 15 नवंबर 2024 को टोक्यो में हुए एक MoI (Memorandum of Implementation) के तहत आगे बढ़ रही है। इसमें भारत की भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और जापान की Acquisition, Technology and Logistics Agency (ATLA) मिलकर इस तकनीक को विकसित करेंगी।
यह समझौता भारत और जापान के बीच पहला ऐसा रक्षा सह-विकास प्रोजेक्ट है, जिसमें तकनीक का संयुक्त उत्पादन किया जाएगा। इसे 2015 के रक्षा तकनीक हस्तांतरण समझौते के तहत एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस साझेदारी के दौरान जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने भारत में 10 ट्रिलियन येन निवेश की भी घोषणा की और दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
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