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भारत अगले महीने Pax Silica में हो सकता है शामिल, जानिए अमेरिका-नेतृत्व वाली इस पहल के बारे में

भारत के Pax Silica में शामिल होने से भारत-अमेरिका तकनीकी सहयोग मजबूत होगा और AI, सेमीकंडक्टर व क्रिटिकल मिनरल्स में सुरक्षित वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा मिलेगा।

भारत के अगले महीने अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक समूह Pax Silica का पूर्ण सदस्य बनने की संभावना है। अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने नई दिल्ली यात्रा के दौरान यह जानकारी दी और बताया कि भारत को इस पहल में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण जल्द मिलने की उम्मीद है। इस कदम से भारत-अमेरिका सहयोग को महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों—जैसे कि क्रिटिकल मिनरल्स, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)—में नई मजबूती मिलेगी।

Pax Silica अमेरिका के विदेश विभाग की एक प्रमुख पहल है, जिसका मुख्य फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सप्लाई चेन सुरक्षा पर है। इसका उद्देश्य सहयोगी और भरोसेमंद साझेदार देशों को एक साझा मंच पर लाकर सुरक्षित, विश्वसनीय और मजबूत वैश्विक तकनीकी व आर्थिक प्रणालियों का निर्माण करना है।

अमेरिकी आर्थिक मामलों के अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग के अनुसार, 20वीं सदी में दुनिया को तेल और स्टील ने संचालित किया, जबकि 21वीं सदी में कंप्यूटर और डिजिटल तकनीक वैश्विक अर्थव्यवस्था की धुरी हैं। इसके लिए लिथियम, कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की आवश्यकता होती है। Pax Silica का लक्ष्य भरोसेमंद देशों के बीच साझा रणनीति बनाना है ताकि भविष्य की AI और तकनीकी प्रणालियों का विकास सुरक्षित तरीके से हो सके।

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यह पहल ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और AI मॉडल्स सहित पूरी टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन को कवर करती है। इसमें शामिल देश आपसी समृद्धि, तकनीकी प्रगति और आर्थिक सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने पर सहमत होते हैं।

Pax Silica का दीर्घकालिक उद्देश्य तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी देशों को एकजुट करना है, ताकि AI-आधारित नई अर्थव्यवस्था की पूरी क्षमता का लाभ उठाया जा सके। Pax Silica घोषणा में कहा गया है कि AI की तकनीकी क्रांति तेज़ी से वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन को नया आकार दे रही है।

इसके प्रमुख लक्ष्यों में एक महत्वपूर्ण उद्देश्य “कोएर्सिव डिपेंडेंसी” को कम करना है, यानी किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता से बचना। साथ ही, भरोसेमंद डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना और उन्नत तकनीकों को चोरी या दुरुपयोग से सुरक्षित रखना भी इस पहल के मुख्य उद्देश्य हैं।

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