मातृ मृत्यु दर में भारत की बड़ी उपलब्धि, एसडीजी लक्ष्य हासिल करने की राह पर देश
भारत में मातृ मृत्यु दर घटकर 87 प्रति लाख जीवित जन्म पहुंच गई है। देश सुरक्षित मातृत्व योजनाओं और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दम पर एसडीजी लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।
भारत ने मातृ मृत्यु दर को कम करने के क्षेत्र में पिछले तीन दशकों में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। अधिकारियों ने कहा कि देश की मातृ स्वास्थ्य व्यवस्था अब दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य परिवर्तन अभियानों में से एक बनकर उभर रही है। सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं और जागरूकता अभियानों के कारण मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।
अधिकारियों के अनुसार, भारत में मातृ मृत्यु अनुपात घटकर लगभग 87 मातृ मृत्यु प्रति एक लाख जीवित जन्म तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के तहत निर्धारित मातृ मृत्यु दर कम करने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र के एसडीजी लक्ष्यों के अनुसार वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु अनुपात को 70 से नीचे लाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित प्रसव सेवाओं, संस्थागत डिलीवरी, बेहतर पोषण, टीकाकरण और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार ने इस सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्र और राज्य सरकारों ने ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी भी इस सफलता का बड़ा कारण मानी जा रही है।
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अधिकारियों ने कहा कि भारत ने मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो उपलब्धि हासिल की है, वह विकासशील देशों के लिए एक उदाहरण बन सकती है। हालांकि, सरकार अब भी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और हर महिला तक सुरक्षित मातृत्व सुविधाएं पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी गति से प्रयास जारी रहे, तो भारत तय समय से पहले एसडीजी लक्ष्य हासिल कर सकता है।