भारत को समुद्री जागरूकता को मजबूत करना चाहिए: संजीव सान्याल का रायसीना संवाद 2026 में बयान
संजीव सान्याल ने रायसीना संवाद 2026 में कहा कि भारत को अपनी प्राचीन समुद्री परंपराओं को पुनः स्थापित करना चाहिए और इसे आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
भारत की बढ़ती भूमिका और इंडो-पैसिफिक में उसके सामरिक महत्व पर रायसीना संवाद 2026 में चर्चा हुई। इस सत्र में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल और नीति विशेषज्ञ गौतम चिकेरमाने ने भारत की नौसैनिक रणनीति, तकनीकी क्षमताओं और बदलते सुरक्षा परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए।
संजीव सान्याल ने कहा कि भारत को अपनी प्राचीन समुद्री परंपराओं से जुड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि भारत का इतिहास और रणनीतिक सोच मुख्य रूप से भूमि युद्धों और साम्राज्यों पर केंद्रित रही है, जबकि समुद्र संबंधी गतिविधियों को बहुत कम महत्व दिया गया है। सान्याल ने भारत के विशाल समुद्री क्षेत्र की भी चर्चा की और कहा कि भारत का समुद्री क्षेत्र उसकी भूमि क्षेत्रफल से 70 प्रतिशत बड़ा है, जो एक महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्र है।
उन्होंने INSV कौंडिन्या का उदाहरण दिया, जो 4वीं शताब्दी की प्रौद्योगिकी से बनी एक जहाज है, जिसे पारंपरिक विधियों से बनाया गया था। इस जहाज ने गुजरात से ओमान तक का सफर 17 दिनों में पूरा किया, जिससे यह सिद्ध हुआ कि प्राचीन भारतीय नौका निर्माण तकनीक लंबी समुद्री यात्राओं के लिए सक्षम थी।
संजीव सान्याल ने यह भी कहा कि भारत को अपनी समुद्री जागरूकता को मजबूत करना चाहिए, ताकि वह अपनी सामरिक और आर्थिक नीतियों को बेहतर तरीके से परिभाषित कर सके।