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पाकिस्तान के पीएल-15 का मुकाबला करने की तैयारी, सुखोई-30 एमकेआई में लगाई जा सकती है आरवीवी-बीटी मिसाइल

भारत वायुसेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए सुखोई-30 एमकेआई में रूस की लंबी दूरी वाली आरवीवी-बीटी मिसाइल लगाने पर विचार कर रहा है, जिससे पाकिस्तान के पीएल-15 का मुकाबला होगा।

भारत अपनी वायुसेना को आधुनिक बनाने और हवाई युद्ध क्षमता बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। इसी क्रम में रक्षा मंत्रालय भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों को रूस की आरवीवी-बीटी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। इस प्रस्ताव पर रूसी अधिकारियों के साथ राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी भारत यात्रा के दौरान चर्चा हो सकती है।

The Indian Witness के मुताबिक, भारतीय वायुसेना लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल क्षमता को मजबूत करना चाहती है, ताकि पाकिस्तान के पास मौजूद चीन निर्मित पीएल-15 मिसाइलों का प्रभावी मुकाबला किया जा सके। पाकिस्तान इन मिसाइलों का इस्तेमाल चेंगदू जे-10सीई और जेएफ-17 ब्लॉक-3 लड़ाकू विमानों पर करता है।

300 किलोमीटर तक निशाना

उपलब्ध जानकारी के अनुसार पीएल-15 की मारक क्षमता करीब 200 से 300 किलोमीटर तक बताई जाती है और इसकी अधिकतम गति मैक-5 तक पहुंच सकती है। हालांकि, पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले संस्करण की प्रभावी मारक क्षमता करीब 145 किलोमीटर बताई गई है।

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इसके जवाब में भारत सुखोई-30 एमकेआई को आरवीवी-बीटी जैसी बेहद लंबी दूरी की भारी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल से लैस करने पर विचार कर रहा है। आरवीवी मिसाइल परिवार में आरवीवी-एमडी, आरवीवी-एई/आरवीवी-एसडी और आरवीवी-बीटी शामिल हैं। फिलहाल भारतीय वायुसेना की दिलचस्पी लंबी दूरी वाली आरवीवी-बीटी में है।

हाइपरसोनिक गति से हमला

आरवीवी-बीटी मिसाइल करीब मैक-6 की हाइपरसोनिक गति से हवाई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है। इससे सुखोई-30 विमानों को दुश्मन के हवाई चेतावनी एवं नियंत्रण विमानों और अन्य निगरानी विमानों के खिलाफ लंबी दूरी से हमला करने की क्षमता मिल सकती है।

सुखोई-30 एमकेआई भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी इन विमानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भारत इसके अलावा सुखोई-30 एमकेआई बेड़े के आधुनिकीकरण से जुड़े दो अलग-अलग कार्यक्रमों पर भी काम कर रहा है, जिससे विमानों की लक्ष्य पहचान और लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी।

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