पाकिस्तान द्वारा आतंक को राज्य नीति के औज़ार के रूप में इस्तेमाल करना भारत के लिए बर्दाश्त नहीं
यूएन सुरक्षा परिषद में भारत ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में इस्तेमाल करना अस्वीकार्य है और इसे कभी सामान्य नहीं बनाया जा सकता।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान को कड़े शब्दों में जवाब देते हुए भारत ने कहा कि आतंकवाद को राज्य नीति के एक औज़ार के रूप में लगातार इस्तेमाल करना किसी भी तरह से “सामान्य” नहीं हो सकता। भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने पाकिस्तान के यूएन राजदूत असीम इफ्तिखार अहमद के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
सोमवार (26 जनवरी 2026) को ‘अंतरराष्ट्रीय विधि के शासन की पुनः पुष्टि: शांति, न्याय और बहुपक्षवाद को पुनर्जीवित करने के रास्ते’ विषय पर हुई खुली बहस में पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर, जम्मू-कश्मीर और सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में श्री हरीश ने कहा कि सुरक्षा परिषद का निर्वाचित सदस्य होने के बावजूद पाकिस्तान का एजेंडा केवल भारत और उसके नागरिकों को नुकसान पहुंचाना है।
भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को कभी भी सामान्य नहीं बनाया जा सकता, जैसा कि पाकिस्तान करना चाहता है। राजदूत हरीश ने कहा, “यह सामान्य नहीं है कि पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में इस्तेमाल किए जाने को सहन किया जाए। भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जो भी आवश्यक होगा, वह करेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि यह पवित्र सदन पाकिस्तान को आतंकवाद को वैध ठहराने का मंच नहीं बन सकता।
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ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान के बयान को “झूठा और स्वार्थपूर्ण” बताते हुए भारत ने कहा कि अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे। इस हमले के बाद मई में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर चलाया।
राजदूत हरीश ने रेखांकित किया कि भारत की कार्रवाई सीमित, जिम्मेदार और गैर-उत्तेजक थी, जिसका उद्देश्य केवल आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था। उन्होंने कहा कि 10 मई को पाकिस्तानी सेना ने स्वयं भारत से संपर्क कर संघर्षविराम की अपील की थी।
जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत ने दो टूक कहा कि यह उसका आंतरिक विषय है और पाकिस्तान को इस पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। सिंधु जल संधि पर भारत ने कहा कि दशकों तक सद्भावना निभाने के बावजूद पाकिस्तान ने युद्ध और आतंकवाद का रास्ता अपनाया। पहलगाम हमले के बाद भारत को संधि को स्थगित रखने का निर्णय लेना पड़ा।
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