अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद से शेयर बाजार में मजबूती, सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ खुले
अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद और बेहतर कॉर्पोरेट नतीजों से भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ खुले। आईटी व फार्मा शेयर मजबूत रहे, जबकि ऑटो और मेटल शेयरों में कमजोरी रही।
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों तथा जून तिमाही के अब तक उम्मीद से बेहतर कॉर्पोरेट नतीजों के चलते गुरुवार को भारतीय घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की सकारात्मक धारणा देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों में मजबूती दर्ज की गई।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 200 अंकों यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,782.43 पर खुला। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 8 अंकों यानी 0.03 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,632.65 के स्तर पर कारोबार की शुरुआत करता दिखाई दिया।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो शुरुआती कारोबार में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), रसायन, फार्मास्यूटिकल्स और हेल्थकेयर शेयरों में खरीदारी का रुझान देखने को मिला। निफ्टी आईटी, निफ्टी केमिकल्स, निफ्टी फार्मा और निफ्टी 500 हेल्थकेयर सूचकांक में 0.50 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई।
हालांकि, सीमेंट, धातु, ऑटोमोबाइल और रियल्टी सेक्टर दबाव में रहे। निफ्टी सीमेंट, निफ्टी मेटल, निफ्टी ऑटो और निफ्टी रियल्टी सूचकांकों में 0.52 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई।
निफ्टी के प्रमुख शेयरों में ट्रेंट, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस, टीएमपीवी, भारती एयरटेल, ओएनजीसी, हिंदाल्को इंडस्ट्रीज़, जेएसडब्ल्यू स्टील, कोटक महिंद्रा बैंक, मारुति सुज़ुकी, टाटा स्टील और बजाज ऑटो शुरुआती कारोबार में सबसे अधिक गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे।
बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को शुद्ध बिकवाल रहे और उन्होंने 943 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,883 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को मजबूत समर्थन दिया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी रिपोर्टें सामने आई हैं कि अमेरिका-ईरान संघर्ष समाप्त करने के लिए ईरान और ओमान के बीच एक प्रस्तावित समझौते पर चर्चा चल रही है। इस प्रस्ताव के तहत ईरान को होरमुज़ जलडमरूमध्य से खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाजों पर नियंत्रण की भूमिका मिल सकती है, जिसे ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण रियायत माना जा रहा है।
कमोडिटी बाजार में भी राहत देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चा तेल 0.51 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना रहा, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल 0.77 प्रतिशत गिरकर 74.64 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
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