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इंदौर में दूषित पानी का संकट: क्या हुआ, कहां चूक हुई और खुद को कैसे रखें सुरक्षित

इंदौर के भागीरथपुरा में सीवेज मिला दूषित पानी पीने से दस्त और उल्टी का प्रकोप फैला, 11 मौतें हुईं। घटना ने सुरक्षित जल आपूर्ति और निगरानी की अहमियत उजागर की।

भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में गिने जाने वाले इंदौर में 2026 की शुरुआत में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट सामने आया है। भागीरथपुरा इलाके में नल के पानी से बदबू, कड़वाहट और रंग बदलने की शिकायतों के बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ने लगे। दूषित पेयजल पीने के कारण उल्टी, दस्त, तेज बुखार और डिहाइड्रेशन के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई, जिससे अस्पतालों में मरीजों की भीड़ लग गई। इस जलजनित बीमारी के प्रकोप में अब तक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और सैकड़ों लोग इलाज के लिए भर्ती कराए गए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, असुरक्षित पानी पीने से गैस्ट्रोएंटेराइटिस, हैजा, टाइफाइड और पेचिश जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इंदौर मामले में शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि सीवेज लाइन से गंदा पानी पीने की पाइपलाइन में मिल गया, जिससे यह संकट पैदा हुआ।

घटनाक्रम 
दिसंबर 2025 के मध्य में भागीरथपुरा के करीब 15 हजार निवासियों ने नल के पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई। 25 दिसंबर तक पानी की आपूर्ति जारी रही। 27-28 दिसंबर को बीमारियों के पहले मामले सामने आए। 29 दिसंबर को मौतों की पुष्टि हुई और 30 दिसंबर तक 1,100 से अधिक लोग बीमार बताए गए। 31 दिसंबर को एक शिशु की मौत सहित कई मौतों की सूचना मिली, जिसके बाद अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए निलंबन और बर्खास्तगी की गई। 1-2 जनवरी 2026 को जांच में पानी में बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि हुई और प्रभावित पाइपलाइन को ठीक किया गया।

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लक्षण और जोखिम
उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बुखार, कमजोरी और डिहाइड्रेशन इसके प्रमुख लक्षण हैं। बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर इम्युनिटी वाले लोग सबसे अधिक जोखिम में हैं।

बचाव के उपाय
पीने के पानी को उबालकर इस्तेमाल करें, प्रमाणित वॉटर फिल्टर का प्रयोग करें, हाथों की साफ-सफाई रखें और पानी में गंदगी दिखने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। हल्के मामलों में ORS और आराम से राहत मिल सकती है, लेकिन गंभीर लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क जरूरी है।

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